रीवा में बाढ़ का कहर, ड्रम की नाव से पहुंचाई पार्थिव देह

रीवा। डिजिटल डेस्क

रीवा के तराई अंचल में टमस नदी के उफान ने एक परिवार के सामने अंतिम संस्कार तक की मुश्किल खड़ी कर दी। रास्ता पानी में डूबा होने के कारण परिजनों ने दो ड्रमों को बांधकर अस्थायी नाव बनाई और पार्थिव देह को गांव तक पहुंचाया। इस घटना का वीडियो अब सामने आया है। घटना की स्वतंत्र पुष्टि के लिए उपलब्ध रिपोर्ट में भी रौली गांव और दो ड्रमों से शव ले जाने की जानकारी सामने आई है।

टमस नदी के उफान से गांव का रास्ता बंद

तराई अंचल के अतरैला थाना क्षेत्र के रौली गांव निवासी मोतीलाल तिवारी (85) की शुक्रवार को इलाज के दौरान रीवा में मौत हो गई। परिवार के मुताबिक, उस समय टमस नदी उफान पर थी और गांव चारों ओर से पानी से घिरा हुआ था।
परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्थिव देह को गांव स्थित घर तक पहुंचाने की थी। परिजन विद्याधर तिवारी के अनुसार, प्रशासन से स्टीमर या अन्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए संपर्क किया गया, लेकिन मदद नहीं मिल सकी।

दो ड्रम जोड़कर बनाई अस्थायी नाव

परिजनों ने इसके बाद स्थानीय स्तर पर ही रास्ता निकालने का फैसला किया। दो ड्रमों को आपस में बांधा गया और उनके ऊपर लकड़ी का पटरा रखा गया।
इसके बाद मोतीलाल तिवारी की पार्थिव देह को पटरे पर लिटाया गया। ड्रमों से बनी इस अस्थायी नाव को रस्सियों की मदद से खींचते हुए पानी के रास्ते गांव तक ले जाया गया।
उपलब्ध रिपोर्ट में भी बताया गया है कि बाढ़ के कारण घर तक पहुंचने का रास्ता बाधित था और ग्रामीणों ने दो ड्रमों को जोड़कर शव को घर तक पहुंचाया।

परिजनों ने प्रशासन से मदद नहीं मिलने का दावा किया

परिवार का कहना है कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उन्होंने प्रशासन से सहायता मांगी थी, लेकिन समय पर स्टीमर या दूसरी सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाई। इसके बाद उन्हें खुद ही यह इंतजाम करना पड़ा।
परिजनों के मुताबिक पानी के बीच इस तरह पार्थिव देह को ले जाना जोखिम भरा था। उनका कहना है कि यदि समय पर मदद मिल जाती तो इस तरह का जुगाड़ नहीं करना पड़ता।
हालांकि, एसडीएम पियूष भट्ट ने बताया कि फिलहाल उन्हें इस तरह की किसी घटना की जानकारी नहीं है। इसलिए प्रशासन की ओर से मदद मांगे जाने और उपलब्ध नहीं होने के दावे की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।

वीडियो सामने आने के बाद चर्चा में आया मामला

पूरे घटनाक्रम का वीडियो रविवार को सामने आया, जिसमें ग्रामीण पानी से भरे रास्ते पर ड्रमों से बनाई गई अस्थायी नाव के जरिए पार्थिव देह को ले जाते दिखाई दे रहे हैं।
घटना ने बाढ़ प्रभावित गांवों में आवागमन और आपात स्थिति में उपलब्ध राहत एवं बचाव व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में भी इस घटना को रौली गांव और जवा जनपद क्षेत्र से जोड़कर बताया गया है।

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