उत्तराखंड के ऋषिकेश के सात मोड़ (सात मोड़ रिजर्व फॉरेस्ट) में हजारों पेड़ों की कटाई के विरोध में चल रहा आंदोलन अब तेज हो गया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण परियोजना के नाम पर शिवालिक के जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। वहीं पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को हिरासत में लिया, जिसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गया।
क्या है पूरा मामला
देहरादून-ऋषिकेश के भानियावाला–ऋषिकेश मार्ग (NH-7) के चौड़ीकरण के लिए शिवालिक रिजर्व फॉरेस्ट के 4,369 पेड़ों को काटने और 754 पेड़ों के प्रतिरोपण का प्रस्ताव है। सरकार का कहना है कि यह परियोजना यातायात सुधार और सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है, जबकि पर्यावरणविदों का कहना है कि इससे जंगल और वन्यजीव गलियारे (Elephant Corridor) पर गंभीर असर पड़ेगा।
सात मोड़ बना आंदोलन का केंद्र
पिछले कई दिनों से स्थानीय निवासी, छात्र, पर्यावरण कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के सदस्य सात मोड़ क्षेत्र में धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन इसके लिए बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई उचित नहीं है। कई लोग पेड़ों से लिपटकर विरोध भी कर रहे हैं, जिसकी तुलना ‘चिपको आंदोलन’ से की जा रही है।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया
रिपोर्टों के अनुसार, पेड़ काटने का काम जारी रखने के दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया। विरोध प्रदर्शन के बीच काम रोकने की कोशिश करने वाले कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में विभिन्न सामाजिक संगठनों और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल बताए गए हैं। पुलिस का कहना है कि वह प्रशासन के आदेशों का पालन कर रही थी।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला
यह मामला न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। पेड़ों की कटाई और सड़क परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित रही है। पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि अंतिम निर्णय आने तक कटाई रोकी जानी चाहिए। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि परियोजना आवश्यक स्वीकृतियों के आधार पर आगे बढ़ रही है।
सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम के बीच कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। कुछ पोस्टों में आरोप लगाया गया कि जिस तरह दिल्ली में सोनम वांगचुक के मामले पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई, उसी तरह सात मोड़ में प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठने चाहिए। इन पोस्टों में सरकार की पर्यावरण नीतियों और विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीके की आलोचना की गई।
हालांकि, यह राजनीतिक टिप्पणी और संबंधित व्यक्तियों की राय है। सरकार की ओर से इन आरोपों पर अलग-अलग अवसरों पर यह कहा गया है कि सड़क परियोजना सार्वजनिक हित और विकास कार्यों का हिस्सा है तथा सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।
‘ब्लैक हरेला’ के रूप में भी हुआ विरोध
हरेला पर्व के अवसर पर कई लोगों ने काले कपड़े पहनकर ‘ब्लैक हरेला’ मनाया और पेड़ों की कटाई के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे पर्यावरण संरक्षण का प्रतीकात्मक विरोध बताया।