सतना। डिजिटल डेस्क
फोन पर ऑर्डर लेकर ब्रांडेड शराब बाजार से कम कीमत पर घर पहुंचाने वाले कथित रैकेट का आबकारी विभाग ने भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में मास्टरमाइंड समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में शराब की बोतलों की पैकिंग से छेड़छाड़ और मदिरा में गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। आबकारी विभाग ने सैंपल जांच के लिए लैब भेजे हैं। दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
शिकायत के बाद गोपनीय तरीके से शुरू हुई जांच
सहायक आबकारी आयुक्त एसके उरांव के मुताबिक, शहर में फोन पर ऑर्डर लेकर एजेंटों के माध्यम से ब्रांडेड शराब की आड़ में संदिग्ध शराब की सप्लाई और होम डिलीवरी किए जाने की शिकायत मिली थी। इसके बाद आबकारी अमले ने गोपनीय तरीके से मामले की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान टीम ने पहले रैकेट से जुड़े एक एजेंट के जरिए ब्रांडेड कंपनी की शराब मंगवाई। शराब की जांच करने पर बोतल की पैकिंग में छेड़छाड़ और मदिरा में गड़बड़ी के संकेत मिले। इसके बाद नमूना अग्रिम जांच के लिए लैब भेज दिया गया।
पहले एजेंट पकड़ा, फिर मास्टरमाइंड तक पहुंची टीम
9 सितंबर को सर्किल क्रमांक-1 के प्रभारी आशीष वाटिया ने अपने संपर्कों के जरिए रैकेट से जुड़े एजेंट से शराब मंगवाई थी। इसके बाद आबकारी टीम ने मुख्य आरोपी तक पहुंचने की रणनीति बनाई।
सोमवार शाम टीम ने फिर जाल बिछाया। इस बार जितेंद्र कुमार उर्फ रवि साहू (38), निवासी घूरडांग को फोन पर ब्रांडेड शराब का ऑर्डर दिया गया। जितेंद्र ने अपने एजेंट सुनील कुशवाहा (23) के जरिए शराब की डिलीवरी भेजी।
डिलीवरी देने पहुंचे सुनील को सिविल ड्रेस में तैनात आबकारी टीम ने पकड़ लिया। उससे मिली जानकारी के आधार पर टीम ने घूरडांग में दबिश देकर जितेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया।
कार्रवाई की भनक लगी तो सामान खुर्द-बुर्द करने का आरोप
आबकारी विभाग के अनुसार, कार्रवाई की भनक लगने पर जितेंद्र ने अपने घर में रखी अवैध मदिरा और मोबाइल फोन को खुर्द-बुर्द कर दिया था। टीम अब रैकेट में इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क और सप्लाई चेन की जानकारी जुटा रही है।
अधिकारियों को आशंका है कि इस नेटवर्क के जरिए शराब की बोतलों की पैकिंग में छेड़छाड़ कर शराब की सप्लाई की जा रही थी। हालांकि शराब नकली या मिलावटी होने की अंतिम पुष्टि लैब जांच की रिपोर्ट के बाद ही होगी।
आबकारी अधिनियम में केस, दोनों जेल भेजे गए
जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(1)(क) और मिलावटी व जहरीली शराब के व्यापार से संबंधित धारा 49(क) के तहत कार्रवाई की गई।
मंगलवार सुबह दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
अब पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश
दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आबकारी विभाग का फोकस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने पर है। टीम अवैध शराब की कथित रिफिलिंग के ठिकानों, एजेंटों और सप्लाई चेन की जानकारी जुटा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई में उपनिरीक्षक नीलेश गुप्ता, संजय साकेत, मुख्य आरक्षक राजकरण त्रिपाठी, मंगलदीन कोल, शंकर दयाल प्रजापति तथा आरक्षक आशुतोष तिवारी और अमृता उरमलिया की भूमिका रही।