सतना। मानसून की पहली तेज बारिश ने मंगलवार को सतना शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने ला दी। करीब तीन घंटे तक हुई लगातार बारिश के बाद जिला अस्पताल, गर्ल्स कॉलेज, बस स्टैंड, भरहुत नगर समेत कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए। सड़कों पर घुटनों तक पानी भरने से यातायात प्रभावित रहा और मरीजों, छात्राओं तथा आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
अस्पताल और कॉलेज परिसर में भरा पानी
बारिश के बाद जिला अस्पताल परिसर में जलभराव हो गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। वहीं गर्ल्स कॉलेज परिसर और आसपास की सड़कों पर भी पानी भर जाने से छात्राओं को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सड़कें बनीं तालाब, वाहन फंसे
भरहुत नगर, बस स्टैंड और शहर के अन्य प्रमुख मार्गों पर घुटनों तक पानी जमा हो गया। कई स्थानों पर ई-रिक्शा और छोटे वाहन पानी में फंस गए, जबकि कुछ दोपहिया वाहन फिसलने और पलटने की घटनाएं भी सामने आईं। जलभराव के कारण लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा और यातायात की रफ्तार थम गई।
सीवर चैंबर फूटने से बढ़ी परेशानी
तेज बारिश के दौरान कई इलाकों में सीवर लाइन के चैंबर उफन पड़े, जिससे गंदा पानी सड़कों पर फैल गया। भरहुत नगर सहित कई क्षेत्रों में सड़क और नाली का अंतर तक समझना मुश्किल हो गया। स्थानीय लोगों ने जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए।
महापौर के निवास के सामने भी जलभराव
बारिश के बाद महापौर योगेश ताम्रकार के निवास के सामने की सड़क पर भी पानी भर गया। इसे लेकर लोगों ने नगर निगम की प्री-मानसून तैयारियों और स्मार्ट सिटी परियोजना के दावों पर सवाल खड़े किए। नागरिकों का कहना है कि नालियों की सफाई और जलनिकासी व्यवस्था पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद पहली ही तेज बारिश में शहर की स्थिति बिगड़ जाती है।
हर साल दोहराई जाती है समस्या
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या नई नहीं है। हर वर्ष शहर के कई हिस्सों में यही हालात बनते हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत हुए विकास कार्यों का असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहा।