सतना। डिजिटल डेस्क
शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय सतना में बहुमंजिला भवनों की 27 में से 13 लिफ्ट पिछले करीब छह महीने से बंद पड़ी हैं। इसके चलते डॉक्टर, कर्मचारी, छात्र और उनके परिजन रोजाना आठ से नौ मंजिल तक सीढ़ियों के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं। लिफ्टों के सुधार के लिए बजट को लेकर लगातार पत्राचार के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका है।
छह महीने से बंद हैं 13 लिफ्ट
मेडिकल कॉलेज में ऑर्बिस एलिवेटर कंपनी लिमिटेड की कुल 27 लिफ्ट स्थापित हैं। इनमें से 13 लिफ्टों में सुधार कार्य कराया जाना है। कॉलेज से जुड़े लोगों के मुताबिक लिफ्ट बंद होने का सबसे ज्यादा असर एकेडमिक ब्लॉक, छात्रावास और आवासीय भवनों में आने-जाने वालों पर पड़ रहा है।
एकेडमिक ब्लॉक में छात्रों को दिन में कई बार अलग-अलग मंजिलों पर जाना पड़ता है। ऐसे में सीढ़ियों का इस्तेमाल उनकी मजबूरी बन गया है। वहीं, बहुमंजिला आवासीय भवनों में रहने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों को भी रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
फरवरी में खत्म हुई लिफ्टों की वारंटी
जानकारी के अनुसार सभी लिफ्टों की वारंटी अवधि फरवरी 2026 में समाप्त हो चुकी है। लिफ्टों के मेंटेनेंस और सुधार कार्य के लिए 5 लाख रुपये से अधिक खर्च का अनुमान बताया गया है।
निवर्तमान डीन डॉ. एसपी गर्ग की ओर से लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संचालनालय को बजट उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा गया था। इसमें 13 लिफ्टों के सुधार के लिए 7 लाख 5 हजार 78 रुपये और ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए 8 लाख 21 हजार 612 रुपये की मांग की गई थी।
लिफ्टों के सुधार को लेकर पीआईयू और लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री को भी पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक सभी बंद लिफ्टों को चालू नहीं कराया जा सका है।
रहवासियों ने अपने खर्च से चालू कराई एक लिफ्ट
कॉलेज से जुड़े लोगों के अनुसार लिफ्टों के सुधार को लेकर कई बार लिखित शिकायतें की गई हैं। आवासीय परिसर की एक लिफ्ट को रहवासियों ने कथित तौर पर अपने खर्च से चालू कराया है।
रहवासियों का दावा है कि इस लिफ्ट की रस्सी कमजोर है और इससे सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। उनका कहना है कि लिफ्ट की तकनीकी और सुरक्षा जांच कराकर आवश्यक सुधार तत्काल कराया जाना चाहिए।
हैंडओवर और डिफेक्ट लायबिलिटी पर उठ रहे सवाल
लिफ्ट कंपनी और निर्माण एजेंसी के बीच हैंडओवर की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कॉलेज से जुड़े सूत्रों का दावा है कि लिफ्ट कंपनी ने वर्ष 2022 में ही निर्माण कंपनी को हैंडओवर कर दिया था, जबकि भवन का हैंडओवर वर्ष 2023 में हुआ।
आवासीय परिसर में रहने वाले चिकित्सकों के मुताबिक उन्होंने भवनों का उपयोग वर्ष 2024 और 2025 में किया। ऐसे में तीन वर्ष की डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि की गणना और वास्तविक उपयोग अवधि को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कॉलेज से जुड़े लोगों का कहना है कि यह मुद्दा उच्च अधिकारियों के सामने भी उठाया जा चुका है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
7.05 लाख के बजट का इंतजार
13 लिफ्टों के सुधार के लिए 7,05,078 रुपये के बजट की मांग की गई है। वहीं, ट्रांसफार्मर स्थापना के लिए 8,21,612 रुपये की राशि प्रस्तावित है। अब कॉलेज से जुड़े लोगों की नजर बजट उपलब्ध होने और बंद लिफ्टों के तकनीकी सुधार पर है, ताकि बहुमंजिला भवनों में डॉक्टरों, छात्रों, कर्मचारियों और रहवासियों की आवाजाही आसान हो सके।