मध्य प्रदेश के सतना जिले में जनपद पंचायत मझगवां के उपयंत्री सतीश समेले के खिलाफ जिला पंचायत प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सरकारी कार्यों के निरीक्षण के दौरान बंदूक लेकर जाने, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अनदेखी, वित्तीय अनियमितताओं और अनुशासनहीनता के आरोपों के चलते उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
चार पन्नों के आदेश में कई गंभीर आरोप
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जारी चार पन्नों के निलंबन आदेश में उपयंत्री सतीश समेले पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आदेश के अनुसार उन पर सरकारी कार्यों में लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना, वित्तीय अनियमितताओं, शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने और आचरण नियमों का उल्लंघन करने के आरोप हैं। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग, सतना निर्धारित किया गया है। साथ ही उन्हें वर्तमान सेक्टर के सभी शासकीय कार्यों से अलग कर दिया गया है।
सरकारी निरीक्षण में बंदूक लेकर पहुंचे
निलंबन आदेश के मुताबिक उपयंत्री सतीश समेले सरकारी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने के दौरान बंदूक लेकर पहुंचते थे। आरोप है कि इससे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में भय का माहौल बनता था और सरकारी कार्य प्रभावित होते थे।
कारण बताओ नोटिस के जवाब में समेले ने कार्यस्थल पर बंदूक लेकर जाने की बात स्वीकार की। हालांकि, विभाग ने उनके जवाब को संतोषजनक नहीं माना। इस मामले की जांच अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) स्तर पर भी जारी है।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी जांच के दायरे में
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार ग्राम पंचायत कैलाशपुर में स्वीकृत शांतिधाम के स्थान पर दूसरे गांव में निर्माण कराए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से कथित रूप से राशि लेने, खेत तालाब निर्माण सामग्री के भुगतान में अनियमितता, पंचायत कार्यों में कथित कमीशन लेने, अभिलेख समय पर उपलब्ध नहीं कराने तथा अन्य शिकायतों को भी विभागीय जांच में शामिल किया गया है।इन मामलों में विभाग का कहना है कि उपयंत्री की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण आरोपों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
एक महीने में मांगी गई जांच रिपोर्ट
जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर मानते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच अधिकारी के रूप में जनपद पंचायत उचेहरा के सीईओ तथा प्रस्तुतकर्ता अधिकारी के रूप में जनपद पंचायत मझगवां के सीईओ को नियुक्त किया गया है। दोनों अधिकारियों को एक माह के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।