सिवनी। डिजिटल डेस्क
मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के छपारा क्षेत्र के भूतबंधानी का जम्बो सीताफल अब स्थानीय लोगों को भी आसानी से उपलब्ध होने लगा है। बड़े आकार, खास मिठास और बेहतर गुणवत्ता के लिए पहचान रखने वाले इस सीताफल की बिक्री के लिए जिला मुख्यालय में पहली बार विशेष काउंटर शुरू किया गया है। कंपनी गार्डन के बाहर दलसागर चौपाटी की ओर लगाए गए इस काउंटर पर पांच दिन में करीब 100 पेटियां बिक चुकी हैं।
अब तक जिले में पैदा होने वाले जम्बो सीताफल का बड़ा हिस्सा बाहरी व्यापारी दूसरे शहरों में भेज देते थे। इससे स्थानीय लोगों को अपने जिले के इस खास फल का स्वाद चखने का अवसर कम मिलता था। उद्यानिकी विभाग की पहल से अब उत्पादक किसान सीधे सिवनी में सीताफल बेच रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलने और स्थानीय लोगों तक फल पहुंचने की उम्मीद बढ़ी है।
बिचौलियों से आगे बढ़कर सीधे ग्राहकों तक पहुंच रहे किसान
जम्बो सीताफल की बिक्री के लिए उद्यानिकी विभाग ने उत्पादक किसानों को स्थानीय बाजार से जोड़ने की पहल की है। खैरमटाकोल के किसान राजकुमार भलावी कंपनी गार्डन के बाहर लगाए गए काउंटर पर सीताफल बेच रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पांच दिनों में करीब 100 पेटियों की बिक्री हो चुकी है। हालांकि, काउंटर की शुरुआत और उपलब्धता के बारे में शहर में व्यापक प्रचार नहीं होने के कारण अभी बड़ी संख्या में लोगों को इसकी जानकारी नहीं है।
विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक स्थानीय ग्राहक इस काउंटर तक पहुंचें। इससे किसानों को सीधे बिक्री का अवसर मिलेगा और उपभोक्ताओं को स्थानीय उपज खरीदने की सुविधा मिलेगी।
जबलपुर, भोपाल और नागपुर में भी काउंटर लगाने की तैयारी
सिवनी में मिली शुरुआती प्रतिक्रिया के बाद उद्यानिकी विभाग जम्बो सीताफल की बिक्री का दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए जबलपुर, भोपाल और नागपुर में भी किसान काउंटर लगाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
यदि किसान इन शहरों में बिक्री के लिए तैयार होते हैं, तो वहां भी सीधे ग्राहकों तक जम्बो सीताफल पहुंचाया जा सकेगा। इससे किसानों को नए बाजार मिल सकते हैं और उत्पाद की पहचान जिले से बाहर भी मजबूत हो सकती है।
सिवनी के सीताफल की मांग दिल्ली, आगरा, झांसी, वाराणसी, गोरखपुर, नागपुर, रायपुर और मुंबई जैसे शहरों में भी बताई जाती है। अब स्थानीय स्तर पर बिक्री शुरू होने से जिले के लोगों को भी इस उपज की उपलब्धता का लाभ मिलने लगा है।
जीआई टैग से मिली नई पहचान
भूतबंधानी के जम्बो सीताफल को इस साल भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग मिलने से इसकी पहचान को नया आधार मिला है। जीआई टैग किसी उत्पाद को उसके खास भौगोलिक क्षेत्र और उससे जुड़ी विशिष्ट विशेषताओं के आधार पर पहचान देता है।
इससे उत्पाद की अलग पहचान बनाने, बाजार में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ाने और संबंधित उत्पादकों को बेहतर अवसर दिलाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसानों को इसका कितना आर्थिक लाभ मिलेगा, यह बाजार, बिक्री व्यवस्था और उत्पाद की मांग पर निर्भर करेगा।
सीताफल उत्पादक एफपीओ भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के माध्यम से वर्ष 2023 में जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था। उद्यानिकी विभाग ने किसानों को संगठित करने के लिए जिले में दो सीताफल उत्पादक किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ भी गठित किए हैं।
एक किलो तक वजनी होता है
छपारा के भूतबंधानी क्षेत्र में पैदा होने वाला जम्बो सीताफल अपने बड़े आकार के लिए जाना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुछ फलों का वजन 800 ग्राम से एक किलोग्राम तक पहुंच जाता है। हालांकि, इसका औसत वजन लगभग 200 से 650 ग्राम प्रति फल बताया गया है।
सहायक संचालक उद्यानिकी डॉ. आशा उपवंशी वासेवार के अनुसार, जिले में लगभग 695 हेक्टेयर क्षेत्र में सीताफल की खेती होती है और इसका उत्पादन करीब 6,090 मीट्रिक टन बताया गया है।
इतने बड़े उत्पादन के बावजूद किसानों के लिए बेहतर बाजार और प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित करना महत्वपूर्ण है, ताकि फल की बिक्री के साथ-साथ उससे बनने वाले उत्पादों से भी आय के अवसर बढ़ सकें।
सीताफल के पल्प से आइसक्रीम और मिठाइयां बनाने की संभावना
सीताफल केवल ताजे फल के रूप में ही नहीं, बल्कि प्रसंस्करण के जरिए भी बाजार में उपयोगी है। इसके गूदे यानी पल्प से आइसक्रीम, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी, शेक और कई तरह की मिठाइयां बनाई जा सकती हैं।
जिले में सीताफल के पल्प प्रसंस्करण के लिए तीन इकाइयां स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई है। पल्प आधारित उत्पादों की मांग बढ़ने पर किसानों के लिए फल की बिक्री के अतिरिक्त नए बाजार खुल सकते हैं।
सीताफल के पत्तों और छिलकों का उपयोग जैविक खाद जैसे उत्पाद बनाने में भी किया जा सकता है। इससे फसल के अलग-अलग हिस्सों का उपयोग बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की संभावना है।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए बाजार विस्तार अहम
सिवनी में जम्बो सीताफल का काउंटर शुरू होना स्थानीय उत्पाद को स्थानीय बाजार से जोड़ने की दिशा में एक पहल है। अगले चरण में जबलपुर, भोपाल और नागपुर जैसे शहरों में बिक्री केंद्र स्थापित हो पाते हैं या नहीं, यह किसानों की भागीदारी और विभाग की व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
यदि सीधे बिक्री, बेहतर विपणन और प्रसंस्करण को साथ लेकर काम किया जाता है, तो भूतबंधानी के जम्बो सीताफल की पहचान के साथ किसानों को भी अधिक अवसर मिल सकते हैं।