नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
दिल्ली में CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया है। दोनों करीब सात दिन न्यायिक हिरासत में रहे। उनकी रिहाई का आदेश विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दिया। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने उनकी हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी, लेकिन मजिस्ट्रेट ने रिहाई का आदेश जारी किया।
दोनों को 23 अक्टूबर को दोबारा पेश होने और जमानतदारों से संबंधित औपचारिकताएं पूरी करने का निर्देश दिया गया है। रिहाई के साथ उन्हें शांति बनाए रखने और निर्धारित शर्तों का पालन करने की जिम्मेदारी भी दी गई है।
सात दिन तिहाड़ जेल में रहे दोनों नेता
आशुतोष रांका और सौरव दास को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से जुड़े मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। मामला जंतर-मंतर में प्रवेश करने और वहां प्रदर्शन करने से संबंधित है। यह स्थान उस समय निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया जा चुका था।
दोनों को 14 अक्टूबर को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। 19 अक्टूबर को हिरासत दो दिन और बढ़ा दी गई। इसके बाद 21 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष मामले पर सुनवाई हुई और रिहाई का आदेश दिया गया।
पुलिस ने मांगी थी हिरासत बढ़ाने की अनुमति
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने दोनों की न्यायिक हिरासत तीन दिन और बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने आगे हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं मानते हुए रिहाई का आदेश दिया।
इससे पहले दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने तत्काल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उन्हें विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही कार्यवाही के परिणाम की प्रतीक्षा करने को कहा था।
शांति बनाए रखने और शर्तों का पालन करने का निर्देश
रिहाई की प्रक्रिया में दोनों नेताओं की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि वे शांति भंग नहीं करेंगे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से संबंधित निर्धारित शर्तों का पालन करेंगे। रिहाई के लिए व्यक्तिगत और जमानतदारों से जुड़े बांड की औपचारिकताएं भी पूरी की गईं।
दोनों को 23 अक्टूबर को फिर पेश होने का निर्देश दिया गया है। इस तारीख को होने वाली कार्यवाही में जमानतदारों से संबंधित औपचारिकताओं और मामले की आगे की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा।
रिहाई के बाद आगे की प्रक्रिया पर नजर
आशुतोष रांका और सौरव दास की रिहाई से उनकी न्यायिक हिरासत समाप्त हो गई है, लेकिन इससे संबंधित कार्यवाही पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। दोनों को निर्धारित तारीख पर पेश होना होगा और रिहाई की शर्तों का पालन करना होगा। मामले में आगे की स्थिति 23 अक्टूबर को होने वाली कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगी।