7 क्विंटल गांजा जब्ती में नया मोड़, ट्रक मालिक झोपड़ी में रहता मिला

सतना। डिजिटल डेस्क

शहडोल में 7 क्विंटल से ज्यादा गांजा से लदे ट्रक की जब्ती के मामले में जांच के दौरान नया मोड़ सामने आया है। पुलिस ट्रक के रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों के आधार पर सतना जिले के नागौद थाना क्षेत्र के पिथौराबाद गांव निवासी बाबू प्रजापति तक पहुंची। बताया गया है कि शहडोल पुलिस उसे हिरासत में लेकर अपने साथ ले गई। हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति के नाम पर ट्रक दर्ज बताया जा रहा है, वह कथित तौर पर झोपड़ी में रहकर मजदूरी करता है और उसने ट्रक के बारे में जानकारी होने से इनकार किया है।

सरकारी योजनाओं के बहाने दस्तावेज लेने का आरोप

मामले में बाबू प्रजापति का कहना है कि उसके पास जमीन तक नहीं है और वह सरकारी जमीन पर बने घर में रहकर मेहनत-मजदूरी करता है। उसे सुनने में भी परेशानी होती है। उसके मुताबिक, उसने कभी ट्रक नहीं देखा और न ही उसे इसकी खरीद या इस्तेमाल की जानकारी है।

उसने आशंका जताई कि काफी समय पहले सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बहाने कुछ लोग उससे आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लेकर गए थे। इस दौरान कई कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए थे। उसे संदेह है कि इसी प्रक्रिया में धोखे से वाहन के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए होंगे।

हालांकि, दस्तावेजों के दुरुपयोग और ट्रक के वास्तविक स्वामित्व को लेकर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। पुलिस जांच से ही स्पष्ट होगा कि वाहन किसने खरीदा, उसका इस्तेमाल कौन कर रहा था और कागजों में बाबू प्रजापति का नाम कैसे दर्ज हुआ।

पांच दिन पहले ट्रक से मिला था 7.36 क्विंटल गांजा

जानकारी के मुताबिक, करीब पांच दिन पहले शहडोल जिले के जयसिंहनगर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर घेराबंदी कर एक ट्रक को रोका था। तलाशी के दौरान अलग-अलग बोरियों में रखा 7 क्विंटल 36 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने ट्रक चालक राहुल विश्वकर्मा (26), निवासी आजमगढ़, उत्तर प्रदेश और खलासी नारायण मंडल, निवासी गिरिडीह, झारखंड को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तीन मोबाइल फोन भी जब्त किए थे।

जब्त ट्रक की कीमत करीब 40 लाख रुपये बताई गई थी। गांजा, वाहन और मोबाइल सहित जब्त सामग्री की कुल कीमत लगभग 1 करोड़ 13 लाख रुपये आंकी गई थी।

ओडिशा से उत्तर प्रदेश तक तस्करी की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गांजे की खेप ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के रास्ते उत्तर प्रदेश ले जाने की योजना थी। पुलिस ने वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर कथित मालिक की पहचान की और उसके गांव तक पहुंची।

मामले में जस्सा गिरोह से संभावित संबंध की बात भी सामने आई है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि और तस्करी नेटवर्क में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

असली मालिक और दस्तावेजों की जांच अहम

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ट्रक वास्तव में बाबू प्रजापति का है या उसके दस्तावेजों का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। इसके साथ ही पुलिस यह भी जांच करेगी कि गांजे की खेप किसकी थी, तस्करी का नेटवर्क किन लोगों तक फैला है और गिरफ्तार चालक तथा खलासी की भूमिका क्या थी।

बाबू प्रजापति को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। उसके खिलाफ आरोपों और वाहन के स्वामित्व पर अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच तथा उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही निकाला जा सकेगा।

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