देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक से लापता एमबीए छात्रा बबीता पांडेय का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। करीब एक महीने से जारी सर्च ऑपरेशन के बावजूद सफलता नहीं मिलने पर अब जांच और तलाशी अभियान को और व्यापक बनाया गया है। रेस्क्यू टीम अब उन दुर्गम इलाकों में भी तलाश करेगी, जहां भालुओं के रहने की आशंका है। इसके साथ ही दयारा बुग्याल क्षेत्र की एक झील की भी गहन तलाशी ली जाएगी।
भालू की गुफाओं और जंगलों में भी होगी तलाश
पुलिस, वन विभाग, SDRF और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया है। अधिकारियों के अनुसार, अब घने जंगलों, भालू के संभावित आवास वाले क्षेत्रों, पानी के स्रोतों और पहले से चिन्हित संदिग्ध स्थानों की दोबारा गहन जांच की जा रही है। कुछ स्थानों पर पहले खोदी गई जमीन को फिर से खोदकर भी जांच की जा रही है ताकि कोई सुराग छूट न जाए।
झील की भी होगी तकनीकी जांच
जांच एजेंसियां उस झील की भी तकनीकी तरीके से तलाशी लेने की तैयारी में हैं, जो गोई बेस कैंप के पास स्थित है। पहले भी इस क्षेत्र की जांच की जा चुकी है, लेकिन अब आधुनिक उपकरणों की मदद से दोबारा सर्च अभियान चलाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच में किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।
29 मई की रात से लापता हैं बबीता
जानकारी के अनुसार, नैनीताल (रामनगर) निवासी 24 वर्षीय बबीता पांडेय 29 मई को दो साथियों के साथ दयारा बुग्याल ट्रेक पर गई थीं। गोई बेस कैंप में रात करीब 11 बजे वह टेंट से बाहर निकलीं, लेकिन वापस नहीं लौटीं। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया है।
सभी पहलुओं पर जांच जारी
मामले में पुलिस पहले से ही बबीता के दोनों ट्रेकिंग साथियों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसियां दुर्घटना, जंगली जानवर के हमले, आपराधिक साजिश और अन्य सभी संभावित पहलुओं पर जांच कर रही हैं। हालांकि अब तक किसी भी संभावना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
लगातार चल रहा है सर्च ऑपरेशन
बबीता की तलाश में पुलिस, SDRF, ITBP, सेना, वन विभाग और अन्य एजेंसियों की संयुक्त टीमें कई दिनों से लगातार अभियान चला रही हैं। ड्रोन, डॉग स्क्वॉड और तकनीकी उपकरणों का भी इस्तेमाल किया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।