देवास। डिजिटल डेस्क
देवास जिले में अवैध शराब तस्करी रोकने के दौरान थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत का मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस के सामने जहां शराब की खेप के स्रोत और तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करने की चुनौती है, वहीं इस कारोबार से जुड़े लोगों के कथित राजनीतिक संपर्क भी चर्चा में हैं। राहुल जायसवाल का नाम सामने आने और उसके कांग्रेस से जुड़े होने के दावे के बाद मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। अब सवाल है कि क्या जांच में शराब तस्करी के साथ उसके राजनीतिक और कारोबारी संपर्कों की भी पड़ताल होगी?
TI की ट्रक से कुचलकर हुई थी मौत
घटना 2 नवंबर 2026 की तड़के करीब 1:30 बजे की बताई गई है। खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी पुलिस टीम के साथ इंदौर-बैतूल हाईवे पर संदिग्ध वाहन को रोकने पहुंचे थे। पुलिस को अवैध शराब परिवहन की सूचना मिली थी।
इसी दौरान ट्रक चालक ने वाहन रोकने के बजाय आगे बढ़ाने की कोशिश की। आरोप है कि ट्रक का पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर से गुजर गया। गंभीर रूप से घायल टीआई को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
घटना के बाद पुलिस ने शराब तस्करी से जुड़े नेटवर्क की जांच शुरू की। इस कार्रवाई में एक अन्य पुलिसकर्मी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है।
ट्रक में छिपाकर ले जाई जा रही थी 1800 लीटर से अधिक शराब
जांच के दौरान ट्रक से 1800 लीटर से अधिक शराब बरामद होने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि वाहन के कैरियर के नीचे विशेष जगह बनाकर शराब छिपाई गई थी।
शराब की खेप के स्रोत और उसके गंतव्य को लेकर जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में इस नेटवर्क का संबंध हरदा जिले के टिमरनी क्षेत्र से जोड़ा गया है। पुलिस को यह भी पता लगाना है कि शराब किसके जरिए खरीदी गई और उसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।
यह जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि तस्करी में इस्तेमाल वाहन, शराब की सप्लाई और उसके परिवहन की व्यवस्था किसी संगठित नेटवर्क की ओर इशारा करती है।
राहुल जायसवाल का नाम आने के बाद राजनीतिक कनेक्शन चर्चा में
मामले में राहुल जायसवाल का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक कनेक्शन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। उसके कांग्रेस से जुड़े होने और पूर्व में युवा कांग्रेस में पद पर रहने के दावे किए गए हैं।
पूछताछ से जुड़े कथित वीडियो में राहुल जायसवाल ने खुद को कांग्रेस से जुड़ा बताया है। एक शराब दुकान में हिस्सेदारी और उसके प्रबंधन से जुड़े होने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, किसी व्यक्ति की राजनीतिक पहचान या किसी पार्टी से जुड़ाव अपने आप में तस्करी में पार्टी की संलिप्तता का प्रमाण नहीं है। यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि संबंधित शराब दुकान और अवैध शराब की खेप के बीच कोई सीधा कारोबारी संबंध था या नहीं।
क्या शराब कारोबार और राजनीतिक संपर्कों की भी होगी जांच
इस मामले का सबसे अहम पहलू यही है। यदि शराब तस्करी के नेटवर्क में शामिल लोगों के राजनीतिक संपर्क सामने आते हैं, तो जांच में उनकी भूमिका और प्रभाव की भी पड़ताल जरूरी होगी।
जांच एजेंसियों को यह स्पष्ट करना होगा कि आरोपियों के राजनीतिक संबंध केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थे या उनका इस्तेमाल कारोबार को संरक्षण देने के लिए किया गया। इसके लिए संबंधित लोगों के कारोबारी लेन-देन, शराब दुकान की साझेदारी, लाइसेंस और तस्करी के नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
फिलहाल किसी राजनीतिक दल या उसके नेतृत्व की इस तस्करी में प्रत्यक्ष भूमिका साबित नहीं हुई है। इसलिए राजनीतिक संरक्षण या फंडिंग से जुड़े दावों को जांच के निष्कर्ष आने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप
दिलीप पुरी की मौत के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। भाजपा नेताओं ने शराब कारोबार से जुड़े लोगों के कांग्रेस से कथित संबंधों पर सवाल उठाए हैं।
वहीं कांग्रेस ने प्रदेश में अवैध शराब और अन्य माफिया गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं ने कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मुख्यमंत्री ने दिए उच्चस्तरीय जांच के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिलीप पुरी की मौत पर शोक जताते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। सरकार ने दिवंगत टीआई के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को सब इंस्पेक्टर पद पर अनुकंपा नियुक्ति देने की घोषणा की है।
विशेष पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन को जांच के लिए घटनास्थल पर भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। जांच में तस्करी के स्रोत, परिवहन व्यवस्था, वाहन के मालिकाना हक और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
जांच के सामने अब ये सवाल
दिलीप पुरी की मौत के बाद जांच का दायरा केवल ट्रक चालक और शराब की बरामदगी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शराब कहां से आई, किसके जरिए खरीदी गई और किन लोगों के माध्यम से आगे पहुंचाई जा रही थी, इसकी पूरी कड़ी सामने आनी जरूरी है।
इसके साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि शराब कारोबार से जुड़े लोगों के राजनीतिक संपर्कों की वास्तविक प्रकृति क्या है। क्या इन संपर्कों का तस्करी नेटवर्क को कोई लाभ मिला या राजनीतिक पहचान का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत प्रभाव के लिए किया जा रहा था?
इन सवालों का जवाब पुलिस जांच, वित्तीय दस्तावेजों, शराब दुकान के रिकॉर्ड और आरोपियों के बीच हुए लेन-देन से ही मिल सकेगा। फिलहाल देवास TI की मौत ने अवैध शराब तस्करी के साथ उसके कथित राजनीतिक संपर्कों को भी जांच के केंद्र में ला दिया है।
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