मध्य प्रदेश के कथित जमीन विवाद ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव से जुड़े आरोपों पर जहां कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे भाजपा की अंदरूनी राजनीति का हिस्सा बताया। अखिलेश के इस बचाव के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी का समाजवाद अब केवल “यादव समाजवाद” बनकर रह गया है।
क्या है पूरा उज्जैन जमीन विवाद
विवाद की शुरुआत उन रिपोर्टों से हुई जिनमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी संस्थाओं ने उज्जैन क्षेत्र में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी। आरोप यह भी लगाए गए कि इनमें से कुछ जमीनें उन इलाकों में हैं जहां भविष्य में सड़क परियोजनाएं, मास्टर प्लान और सिंहस्थ 2028 से जुड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं। हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद न तो मोहन यादव और न ही उनके परिवार ने कोई नई जमीन खरीदी है।
अखिलेश यादव ने क्या कहा
लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने दावा किया कि यह मामला जमीन से ज्यादा भाजपा की आंतरिक राजनीति से जुड़ा हुआ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि भाजपा कुछ मुख्यमंत्रियों को बदलने की तैयारी कर रही है और उसी दिशा में माहौल बनाया जा रहा है। अखिलेश ने यह भी कहा कि मोहन यादव पहले से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े रहे हैं और भाजपा को इस बारे में पहले से जानकारी थी।
ओवैसी ने क्यों साधा निशाना?
अखिलेश यादव के बयान के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए कहा कि जब मुसलमानों से जुड़े मुद्दे सामने आते हैं तब समाजवादी पार्टी उतनी मुखर नहीं दिखती, लेकिन भाजपा के एक मुख्यमंत्री के बचाव में तुरंत सामने आ जाती है। ओवैसी ने इसी संदर्भ में “यादव समाजवाद” वाली टिप्पणी की। ओवैसी के इस बयान के बाद मामला केवल जमीन विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
कांग्रेस क्या आरोप लगा रही है?
मध्य प्रदेश कांग्रेस पहले ही इस मामले में मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर सवाल उठा चुकी है। कांग्रेस नेताओं ने जमीन खरीद की जांच की मांग की है और मामले को सत्ता के दुरुपयोग से जोड़कर देखा है। दूसरी ओर भाजपा और मुख्यमंत्री कार्यालय सभी आरोपों को निराधार बता रहे हैं। फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के दौर में है। एक तरफ कांग्रेस और विपक्ष के कुछ नेता जांच की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री कार्यालय आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है। इसी बीच अखिलेश यादव के समर्थन और ओवैसी के पलटवार ने इस विवाद को राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बना दिया है।