कौन हैं गीतांजलि जे. आंगमो… सोनम वांगचुक की हमसफर, जिन्होंने हर संघर्ष में दिया साथ

सोनम वांगचुक के अस्पताल पहुंचने के बाद उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो (Gitanjali J. Angmo) अचानक राष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गई हैं। सफदरजंग अस्पताल के बाहर उन्होंने साफ कहा कि उनकी और परिवार की सहमति के बिना सोनम वांगचुक को कोई दवा या उपचार नहीं दिया जाए। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग यह जानना चाहने लगे कि आखिर Gitanjali J. Angmo कौन हैं, उनकी सोनम वांगचुक से मुलाकात कैसे हुई और वे हर संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर क्यों खड़ी नजर आती हैं। दरअसल, गीतांजलि केवल सोनम वांगचुक की पत्नी ही नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी सहयोगी, शिक्षा सुधार की साझेदार और Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) की सह-संस्थापक, CEO और Dean भी हैं।

ओडिशा से लद्दाख तक का सफर

गीतांजलि जे. आंगमो का जन्म ओडिशा के बालासोर में हुआ। उन्होंने फकीर मोहन विश्वविद्यालय से भौतिक विज्ञान (Physics) में स्नातक किया और इसके बाद भुवनेश्वर के प्रतिष्ठित Xavier Institute of Management (XIMB) से MBA किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने लगभग छह वर्षों तक कॉरपोरेट क्षेत्र में काम किया। इसके बाद उन्होंने कारोबार और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में कदम रखा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास से जुड़े कई प्रोजेक्ट शुरू किए।

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कैसे हुई सोनम वांगचुक से पहली मुलाकात

सोनम वांगचुक और गीतांजलि की पहली मुलाकात किसी फिल्मी कहानी की तरह नहीं, बल्कि एक शिक्षा सम्मेलन (Education Conference) में हुई थी। गीतांजलि ने एक इंटरव्यू में बताया था कि पहली मुलाकात में ही उन्हें महसूस हुआ कि दोनों की सोच काफी मिलती है। शिक्षा, समाज और जीवन को लेकर उनके विचार इतने समान थे कि बातचीत के दौरान वे एक-दूसरे की बातें पूरी करने लगे। उन्होंने इसे ‘Kindred Soul’ यानी समान सोच वाला जीवनसाथी मिलने जैसा अनुभव बताया।

क्यों छोड़ दिया कॉरपोरेट करियर

गीतांजलि का कहना रहा है कि वह हमेशा अपने जीवन को किसी बड़े सामाजिक उद्देश्य से जोड़ना चाहती थीं। सोनम वांगचुक से मिलने के बाद उन्हें लगा कि शिक्षा के माध्यम से समाज में वास्तविक बदलाव लाने का सपना दोनों मिलकर पूरा कर सकते हैं।

यही सोच उन्हें लद्दाख ले गई, जहां उन्होंने अपनी पेशेवर जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया।

HIAL की स्थापना में निभाई अहम भूमिका

साल 2017 में सोनम वांगचुक और गीतांजलि जे. आंगमो ने मिलकर Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh (HIAL) की स्थापना की।

इस संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों को वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए तैयार करना है। यहां पहाड़ी क्षेत्रों की चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन, स्थानीय तकनीक, उद्यमिता और सामुदायिक विकास पर आधारित शिक्षा दी जाती है। आज गीतांजलि HIAL की Founder, CEO और Dean हैं और संस्थान के संचालन, शैक्षणिक रणनीति तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जिम्मेदारी संभालती हैं।

हर संघर्ष में सोनम वांगचुक के साथ

सोनम वांगचुक जब भी किसी सामाजिक या जनआंदोलन का हिस्सा बने, गीतांजलि हमेशा उनके साथ खड़ी दिखाई दीं। हाल के घटनाक्रम में, जब दिल्ली पुलिस भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल लेकर गई, तब गीतांजलि स्वयं अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन से स्पष्ट कहा कि परिवार और स्वयं सोनम वांगचुक की सहमति के बिना कोई चिकित्सा हस्तक्षेप न किया जाए। इस बयान के बाद वे राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गईं।

पुरस्कार और उपलब्धियां

गीतांजलि जे. आंगमो को शिक्षा और सामुदायिक विकास में योगदान के लिए भारत सरकार की ओर से Women Transforming India Award से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा सुधार, नेतृत्व और सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी पहचान बनाई है।

शिक्षा ही नहीं, बहुआयामी व्यक्तित्व

शिक्षा और प्रबंधन के अलावा गीतांजलि की रुचि मार्शल आर्ट, भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक अध्ययन में भी रही है। HIAL के अनुसार उनका मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना नहीं, बल्कि ऐसा इंसान तैयार करना है जो जीवनभर सीखता रहे और समाज के लिए उपयोगी बने।

क्यों चर्चा में हैं गीतांजलि

फिलहाल गीतांजलि जे. आंगमो इसलिए सुर्खियों में हैं क्योंकि उन्होंने अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक के इलाज को लेकर परिवार की सहमति को आवश्यक बताया। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब वे सार्वजनिक रूप से उनके साथ खड़ी दिखाई दी हैं। पिछले कई वर्षों से वे शिक्षा सुधार, पर्यावरण और सामाजिक अभियानों में समान रूप से सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।

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