सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाला प्रबल प्रताप कौन है? जानिए पूरी कहानी

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को उस समय अभूतपूर्व स्थिति बन गई, जब सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता ने अदालत की कार्यवाही के बीच कागज उछाल दिए और न्यायाधीशों से तीखी बहस करने लगा। कुछ ही मिनटों में सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके बाद हर कोई जानना चाहता है कि आखिर यह प्रबल प्रताप कौन है और कोर्ट में ऐसा क्या हुआ?

क्या हुआ था सुप्रीम कोर्ट में

मामला जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ के सामने सुनवाई के लिए लगा था। प्रबल प्रताप इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देते हुए स्वयं अदालत में पेश हुए। सुनवाई शुरू होते ही उन्होंने अदालत से लखनऊ के एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश देने की मांग की। जब पीठ ने उनके तर्कों से सहमति नहीं जताई तो उन्होंने कथित तौर पर न्यायाधीशों से तीखी भाषा में बात की और कोर्टरूम में केस से जुड़े कागजात उछाल दिए। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अदालत से बाहर ले जाया।

कौन हैं प्रबल प्रताप

अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रबल प्रताप सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता नहीं हैं। वे Petitioner-in-Person के रूप में अपना मामला खुद लड़ रहे थे। सुनवाई के दौरान उन्होंने खुद को “The Sovereign” बताया और न्यायाधीशों को “Judicial Servants” कहकर संबोधित किया, जिसकी भी काफी चर्चा हो रही है।

किस मामले में पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट

प्रबल प्रताप की याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ थी, जिसमें उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट में उन्होंने उस आदेश को चुनौती दी थी और पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया

हंगामे के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ तत्काल अवमानना (Contempt) की कार्रवाई शुरू नहीं की। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता की स्थिति को देखते हुए फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि, मामले के गुण-दोष पर विचार करने के बाद उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज कर दी गई।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा

कोर्टरूम की इस घटना के वीडियो और विवरण सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर प्रबल प्रताप का नाम तेजी से ट्रेंड करने लगा। हालांकि, उनके निजी जीवन और नौकरी से जुड़े कई दावे भी वायरल हो रहे हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए ऐसे दावों को तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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