मुंबई। डिजिटल डेस्क
फिल्म ‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा यानी महाराज जी का किरदार निभाकर शोभिनव सत्य अचानक चर्चा में आ गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि वह इस फिल्म में शुरुआत से लीड एक्टर नहीं थे। वह तो असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर फिल्म से जुड़े थे, लेकिन एक अभिनेता के बीमार पड़ने के बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि कैमरे के पीछे काम कर रहे शोभिनव खुद फिल्म के मुख्य किरदार बन गए।
कौन हैं शोभिनव सत्य
शोभिनव सत्य मूल रूप से लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्होंने एक्टिंग और फिल्ममेकिंग की ट्रेनिंग ओपुलेंट स्कूल ऑफ एक्टिंग एंड फिल्म्स से ली और बाद में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से भी प्रशिक्षण लिया।
कैमरे के सामने बतौर लीड आने से पहले शोभिनव करीब एक दशक तक फिल्म और टेलीविजन के पर्दे के पीछे काम कर चुके हैं। उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर, सेकंड यूनिट डायरेक्टर और स्क्रिप्ट/कंटिन्यूटी जैसे विभागों में काम किया है। ‘CID’, ‘Ragini MMS Returns’ और ‘Happily Ever After’ जैसे प्रोजेक्ट्स से भी उनका जुड़ाव रहा है।
‘हनुमान अंश’ उनके लिए खास इसलिए भी है क्योंकि यही फिल्म उनका बतौर अभिनेता बड़ा स्क्रीन डेब्यू बनी और पहली ही फिल्म में उन्हें नीम करौली बाबा जैसे महत्वपूर्ण किरदार को निभाने का मौका मिला।
लीड एक्टर बनने की कहानी किसी फिल्मी सीन से कम नहीं
‘हनुमान अंश’ की शूटिंग शुरू होने से पहले नीम करौली बाबा की भूमिका के लिए एक दूसरे अभिनेता को चुना गया था। शोभिनव उस समय फिल्म की टीम में सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे।
लेकिन शूटिंग के दौरान मुख्य भूमिका के लिए चुने गए अभिनेता की तबीयत खराब हो गई। फिल्म का सेट तैयार था और शूटिंग रोकना आसान नहीं था। इसी बीच निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की नजर शोभिनव पर गई।
दरअसल, निर्देशक ने शोभिनव को पहली बार देखने पर ही उनके चेहरे में नीम करौली बाबा की झलक महसूस की थी। शुरुआत में सिर्फ शक्ल की समानता के आधार पर फैसला नहीं लिया गया, लेकिन शोभिनव के व्यवहार, उनकी तैयारी और किरदार को समझने की क्षमता ने निर्देशक को प्रभावित किया।
फिर हुआ कई घंटे लंबा ऑडिशन
शोभिनव को अचानक लीड रोल के लिए ऑडिशन देने को कहा गया। इसके बाद निर्देशक ने उनका कई घंटे लंबा स्क्रीन टेस्ट लिया।
विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, यह ऑडिशन चार से पांच घंटे के आसपास चला और चित्रकूट के मंदाकिनी नदी के घाट पर भी सीन टेस्ट किए गए। ऑडिशन के दौरान शोभिनव ने किरदार के संवाद, भाव और खासकर एक महत्वपूर्ण सीन में अपनी कॉमिक टाइमिंग से निर्देशक को प्रभावित किया। इसके बाद उन्हें नीम करौली बाबा के रोल के लिए चुन लिया गया।
यानी जिस व्यक्ति को शुरुआत में कैमरे के पीछे रहकर फिल्म बनाने में मदद करनी थी, वही कुछ समय बाद फिल्म का मुख्य चेहरा बन गया।
निर्देशक को शोभिनव में क्यों दिखे ‘महाराज जी’
शोभिनव की शक्ल की समानता के अलावा उनके व्यक्तित्व ने भी निर्देशक का ध्यान खींचा। चतुर्वेदी के मुताबिक, शोभिनव का व्यवहार शांत और सकारात्मक था। जब बाकी लोग शूटिंग और परिस्थितियों को लेकर चिंतित रहते थे, तब भी वह सहज और सकारात्मक नजर आते थे।
एक और बात उनके पक्ष में गई—शूटिंग शुरू होने से पहले वह टीम के साथ करीब 15 दिन तक स्क्रिप्ट की रिहर्सल कर चुके थे। इसलिए फिल्म की कहानी और किरदार की बारीकियों से वह पहले से परिचित थे।
नीम करौली बाबा से पहले से जुड़ा था आध्यात्मिक रिश्ता
शोभिनव के लिए यह भूमिका सिर्फ एक अभिनय अवसर नहीं थी। उन्होंने बताया है कि वह 2009 से नीम करौली बाबा के भक्त हैं। इसके अलावा वह कई वर्षों से आध्यात्मिक जीवनशैली का पालन करते रहे हैं।
उनके मुताबिक, 2018 से उन्होंने मंगलवार का व्रत रखना शुरू किया और शाकाहारी जीवनशैली अपनाई। इसलिए जब उन्हें बाबा का किरदार निभाने का मौका मिला तो उन्होंने इसे महज संयोग के बजाय एक आध्यात्मिक अनुभव के तौर पर देखा।
एक दिन असिस्टेंट डायरेक्टर, अगले दिन लीड एक्टर
शोभिनव ने अपने इस बदलाव को बेहद अचानक बताया है। जिस प्रोजेक्ट में वह पर्दे के पीछे काम कर रहे थे, उसी में उन्हें अगले ही चरण में मुख्य किरदार निभाना था।
शुरुआत में उनके मन में यह सवाल भी था कि क्या दर्शक उन्हें नीम करौली बाबा के रूप में स्वीकार करेंगे। लेकिन निर्देशक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि दर्शकों की प्रतिक्रिया की चिंता करना उनका काम नहीं, बल्कि निर्देशक की जिम्मेदारी है।
‘हनुमान अंश’ के बाद यही बदलाव अब शोभिनव सत्य की पहचान बन गया है—एक ऐसा अभिनेता जिसने लीड रोल पाने के लिए फिल्मी दुनिया में लंबा इंतजार नहीं किया, बल्कि जिस फिल्म में वह असिस्टेंट डायरेक्टर था, उसी फिल्म में हालात बदलने पर नीम करौली बाबा बन गया।