मुंबई। डिजिटल डेस्क
फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर अपनी कमाई को लेकर चर्चा में है, लेकिन इस फिल्म की कहानी सिर्फ पर्दे पर नहीं, बल्कि उसके सेट पर भी कुछ अलग रही। नीम करोली बाबा के जीवन और दर्शन पर आधारित इस फिल्म की शूटिंग के दौरान सेट को पूरी तरह शाकाहारी रखा गया। शराब पर पाबंदी थी और रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था। निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने खुद भी फिल्म के लिए करीब साढ़े चार महीने तक फ्रूट डाइट का पालन किया।
क्यों रखा गया सेट पर इतना सख्त अनुशासन
निर्देशक-लेखक-निर्माता डॉ. विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक, ‘हनुमान अंश’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि नीम करोली बाबा और उनकी आध्यात्मिक विरासत को पर्दे पर लाने की कोशिश थी। इसी वजह से वह चाहते थे कि फिल्म के निर्माण का माहौल भी उसके विषय के अनुरूप रहे।
चतुर्वेदी ने बताया कि शूटिंग के दौरान पूरा सेट शाकाहारी रखा गया था। इसके साथ ही हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता था। सेट पर गाली-गलौज, लड़ाई-झगड़े और शराब से भी दूरी रखने के नियम थे।
निर्देशक ने खुद इससे भी ज्यादा अनुशासन अपनाया। उनके मुताबिक, फिल्म की रिलीज से पहले करीब 4.5 महीने तक वह फ्रूट डाइट पर रहे। उन्होंने यह भी बताया कि बतौर निर्देशक उन्होंने फिल्म के लिए अपनी फीस नहीं ली।
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शूटिंग में अड़चन आती तो पढ़ी जाती थी हनुमान चालीसा
चतुर्वेदी के मुताबिक, कई बार शूटिंग की शुरुआत सुबह 7 बजे तय होती थी, लेकिन किसी तकनीकी या दूसरी वजह से कैमरा समय पर रोल नहीं हो पाता था। ऐसे मौकों पर टीम साथ बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करती थी।
निर्देशक का मानना था कि फिल्म का विषय जिस आध्यात्मिक व्यक्तित्व से जुड़ा है, उसके अनुरूप सेट का वातावरण बनाए रखना जरूरी था। यही वजह रही कि फिल्म के निर्माण में सामान्य फिल्म सेट से अलग अनुशासन देखने को मिला।
20 साल पहले कैंची धाम से शुरू हुई कहानी
दरअसल, विशाल चतुर्वेदी का नीम करोली बाबा से जुड़ाव करीब 20 साल पुराना बताया जाता है। उस समय वह नैनीताल में तैनात थे। एक दिन भारी बारिश और खराब मौसम के बीच दोस्तों के साथ सफर करते हुए उनकी कार कैंची धाम के प्रवेश द्वार के सामने रुक गई।
चतुर्वेदी ने बाद में इस अनुभव को बेहद प्रभावशाली बताया। इसी घटना के बाद उन्होंने नीम करोली बाबा के जीवन और उनके संदेश के बारे में पढ़ना-समझना शुरू किया और धीरे-धीरे उनके जीवन पर फिल्म बनाने का विचार उनके मन में मजबूत होता गया।
OTT से ठुकराए जाने के बाद और मजबूत हुआ इरादा
फिल्म बनाने की राह हालांकि आसान नहीं थी। चतुर्वेदी ने शुरुआत में इस कहानी को OTT प्लेटफॉर्म्स के सामने रखने की कोशिश की। एक पिच के दौरान मिली प्रतिक्रिया से वह निराश हुए, लेकिन इसी अनुभव ने उन्हें प्रोजेक्ट छोड़ने के बजाय इसे पूरा करने के लिए और दृढ़ कर दिया।
उनका कहना था कि उन्हें लगा कि नीम करोली बाबा की कहानी को लेकर एक अलग तरह की धारणा मौजूद है और उसे सही तरीके से दर्शकों तक पहुंचाना जरूरी है।
‘जय संतोषी मां’ से भी मिली फिल्म बनाने की प्रेरणा
चतुर्वेदी ने यह भी बताया कि 1975 की ‘जय संतोषी मां’ ने उन्हें आध्यात्मिक और धार्मिक सिनेमा की संभावनाओं पर दोबारा सोचने के लिए प्रेरित किया। वह करीब डेढ़ साल तक इस फिल्म का अध्ययन करते रहे।
उनके मुताबिक, उन्हें लगता था कि आध्यात्मिक फिल्मों की एक ऐसी जगह खाली है, जिसे लंबे समय से मुख्यधारा के सिनेमा में पर्याप्त जगह नहीं मिली। इसी सोच ने ‘हनुमान अंश’ के निर्माण के उनके संकल्प को और मजबूत किया।
प्रेमानंद महाराज से भी मिली थी सलाह
फिल्म से जुड़े आध्यात्मिक अनुशासन की चर्चा में प्रेमानंद महाराज की सलाह का भी जिक्र सामने आया है। चतुर्वेदी के मुताबिक, फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद निर्माताओं ने उनसे सुझाव मांगा था। इसके बाद मुख्य कलाकारों के खान-पान को लेकर भी शाकाहारी रहने की सलाह दी गई थी।
10 लाख की ओपनिंग से 100 करोड़ पार तक
‘हनुमान अंश’ 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। शुरुआत बेहद धीमी रही और पहले दिन फिल्म ने करीब 10 लाख रुपये कमाए। इसके बावजूद धीरे-धीरे दर्शकों की प्रतिक्रिया और वर्ड ऑफ माउथ के चलते फिल्म की कमाई बढ़ती गई।
अब फिल्म घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी है, जिससे यह कम बजट की बड़ी स्लीपर हिट के तौर पर चर्चा में है।