देश के कई हिस्सों में कमजोर पड़े मानसून के बीच राहत की खबर सामने आई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हिंद महासागर से बंगाल की खाड़ी तक फैली करीब 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबी क्लाउड बेल्ट (Cloud Band) सक्रिय हो रही है। यदि यह सिस्टम बंगाल की खाड़ी में मजबूत होता है तो पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत के कई राज्यों में फिर से अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।
मानसून की रफ्तार क्यों हुई धीमी
जुलाई के शुरुआती दिनों में देश के कई राज्यों में मानसून कमजोर पड़ गया था। इसकी वजह सक्रिय निम्न दबाव (Low Pressure) प्रणाली का न बन पाना और मानसूनी ट्रफ का सामान्य स्थिति से हट जाना माना जा रहा है। इसी कारण उत्तर भारत, मध्य भारत और पूर्वी राज्यों में बारिश का सिलसिला धीमा पड़ गया। अब मौसम विशेषज्ञों की नजर हिंद महासागर से बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रही विशाल क्लाउड बेल्ट पर है, जो अगले कुछ दिनों में मौसम का मिजाज बदल सकती है।
10 हजार किलोमीटर लंबा ‘बादलों का कारवां’ क्या है
यह कोई एक अकेला बादल नहीं है, बल्कि उपग्रह चित्रों (Satellite Images) में दिखाई देने वाली बादलों की लंबी श्रृंखला (Cloud Band) है। यह हजारों किलोमीटर तक फैली नमी और बादलों की एक पट्टी होती है, जो समुद्र से भारी मात्रा में जलवाष्प लेकर आगे बढ़ती है।
जब यह प्रणाली बंगाल की खाड़ी में पहुंचकर मजबूत होती है, तब वहां निम्न दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना बढ़ जाती है। यही सिस्टम आगे चलकर भारत में मानसून को नई ऊर्जा देता है।
किन राज्यों में बढ़ सकती है बारिश
यदि बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम बनता है तो इसका असर सबसे पहले पूर्वी भारत में दिखाई दे सकता है। इसके बाद बारिश का दायरा धीरे-धीरे मध्य और उत्तर भारत तक फैल सकता है।
संभावित प्रभावित राज्य:
- पश्चिम बंगाल
- ओडिशा
- झारखंड
- बिहार
- छत्तीसगढ़
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- राजस्थान के कुछ हिस्से
- दिल्ली-एनसीआर
- हरियाणा और पंजाब
क्या IMD ने क्या कहा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही संकेत दे चुका है कि बंगाल की खाड़ी में नया मौसम तंत्र विकसित होने की संभावना बनी हुई है। इसके प्रभाव से कई राज्यों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि किस जिले में कितनी बारिश होगी, इसका सटीक पूर्वानुमान संबंधित दैनिक बुलेटिन के आधार पर ही तय होगा।
क्या फिर शुरू होगी झमाझम बारिश
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्लाउड बेल्ट से पर्याप्त नमी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचती है और वहां लो-प्रेशर सिस्टम विकसित हो जाता है, तो देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो सकता है। इससे खेती, जलाशयों और पेयजल की स्थिति में भी सुधार की उम्मीद है। हालांकि मौसम पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह सिस्टम कितना मजबूत बनता है और किस दिशा में आगे बढ़ता है।
Fact Box
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| क्लाउड बेल्ट | 7,000–10,000 किमी (अनुमानित) |
| प्रमुख क्षेत्र | हिंद महासागर से बंगाल की खाड़ी |
| संभावित असर | मानसून की दोबारा सक्रियता |
| प्रभावित क्षेत्र | पूर्वी, मध्य और उत्तर भारत |
| मुख्य वजह | बंगाल की खाड़ी में संभावित Low Pressure |
क्या जानना जरूरी है
क्या 10 हजार किमी लंबा एक ही बादल भारत आ रहा है?
नहीं। यह हजारों किलोमीटर तक फैली बादलों और नमी की एक लंबी पट्टी (Cloud Band) है, कोई एक बादल नहीं।
क्या पूरे भारत में भारी बारिश होगी
ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। बारिश की तीव्रता बनने वाले लो-प्रेशर सिस्टम और स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी
क्या यह आधिकारिक पूर्वानुमान है
क्लाउड बेल्ट का विश्लेषण उपग्रह चित्रों और मौसम विशेषज्ञों के आकलन पर आधारित है। जिलावार पूर्वानुमान के लिए IMD के आधिकारिक बुलेटिन को ही अंतिम माना जाता है।
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