नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
दुनिया के लिए 2027 में खाद्य महंगाई का दबाव बढ़ने का खतरा सामने आया है। अमेरिकी वित्तीय संस्था JPMorgan के अनुमान के मुताबिक, अगर मजबूत El Niño और ऊंची ऊर्जा कीमतों का असर जारी रहता है, तो अगले साल की पहली छमाही में वैश्विक food inflation करीब 5% annualised तक पहुंच सकती है। इसका असर भारत समेत एशिया और लैटिन अमेरिका के कई देशों पर ज्यादा पड़ने की आशंका है।
El Niño क्यों बढ़ा रहा है 2027 का खतरा
El Niño प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से जुड़ी मौसम की स्थिति है। इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, सूखे और तापमान के पैटर्न पर पड़ सकता है।
JPMorgan के मुताबिक, मौजूदा El Niño के साल के अंत तक बहुत मजबूत या “Super El Niño” बनने की 81% संभावना जताई गई थी, जबकि इसके अगले साल तक बने रहने की संभावना 97% आंकी गई थी।
अब अगस्त में अमेरिकी Climate Prediction Center के ताजा अनुमान में भी El Niño के बहुत मजबूत होने की संभावना 90% से अधिक बताई गई है। अक्टूबर-दिसंबर 2026 के दौरान इसके ऐतिहासिक रूप से बेहद मजबूत स्तर तक पहुंचने की संभावना 69% आंकी गई है।
अकेला El Niño भी बढ़ा सकता है food inflation
JPMorgan के अनुमान के मुताबिक, यदि Super El Niño की स्थिति बनती है तो यह अपने आप में global food inflation को peak पर करीब 0.7 percentage point बढ़ा सकता है।
इसका सबसे ज्यादा असर मौसम से प्रभावित कृषि उत्पादन वाले क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है। फसल उत्पादन प्रभावित होने पर खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
तेल और खाद की महंगाई बना सकती है बड़ा दबाव
मौसम के साथ दूसरा बड़ा जोखिम energy और fertilizer prices का है। JPMorgan ने बताया है कि ऊंची energy prices से diesel, fertilizer और food packaging की लागत बढ़ सकती है।
यदि मजबूत El Niño और ऊंची ऊर्जा कीमतें एक साथ बनी रहती हैं, तो food inflation पर असर अकेले मौसम के प्रभाव से काफी ज्यादा हो सकता है। बैंक के अनुमान में food inflation का दबाव करीब 1.3 से 1.5 percentage points तक बढ़ने की संभावना बताई गई है।
2027 की पहली छमाही में 5% तक पहुंच सकता है खाद्य महंगाई का दबाव
JPMorgan का अनुमान है कि इन परिस्थितियों में 2027 की पहली छमाही में global food inflation 5% annualised तक पहुंच सकती है।
इसका असर global headline inflation पर भी पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, food inflation में यह उछाल वैश्विक headline inflation में करीब 0.6 percentage point जोड़ सकता है।
भारत समेत इन देशों पर ज्यादा असर का अनुमान
JPMorgan ने भारत, इंडोनेशिया, ब्राजील और कोलंबिया को ऐसे देशों में रखा है, जहां food-price shock का असर अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकता है।
एशिया और लैटिन अमेरिका के उभरते बाजारों में भोजन का घरेलू महंगाई सूचकांक में बड़ा हिस्सा होता है और कृषि उत्पादन मौसम पर ज्यादा निर्भर रहता है। इसलिए मौसम और खाद की लागत में बदलाव यहां जल्दी असर डाल सकता है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह चेतावनी
भारत में कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर मानसून का बड़ा प्रभाव रहता है। Reuters की 11 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, El Niño के कारण एशिया के कई हिस्सों में फसल बुआई प्रभावित हुई है और भारत में भी मानसून की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है।
हालांकि, भारत के लिए तस्वीर पूरी तरह संकट वाली नहीं है। Reuters की उसी रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास पर्याप्त चावल भंडार मौजूद है और वैश्विक अनाज भंडार भी ऐतिहासिक रूप से मजबूत स्थिति में हैं। बेहतर सिंचाई, मौसम पूर्वानुमान, drought-resistant बीज और आधुनिक कृषि तकनीक भी संभावित नुकसान को कम करने में मदद कर सकते हैं।
खाद की supply भी बनेगी अहम कड़ी
फसल उत्पादन के लिए fertilizer की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर energy prices और geopolitical disruptions के कारण fertilizer supply chain पर दबाव बना हुआ है।
JPMorgan ने भी fertilizer और diesel की लागत को संभावित food-price shock के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में चिन्हित किया है।
भारत सरकार की ओर से fertilizer availability को लेकर उठाए गए कदम भी सामने आए हैं। 24 जुलाई को सरकार ने बताया था कि 2026 में वैश्विक निविदाओं के जरिए अप्रैल में 25 लाख मीट्रिक टन और जून में 17.7 लाख मीट्रिक टन urea सुरक्षित किया गया। सरकार के अनुसार, घरेलू urea production capacity बढ़कर 269.42 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष हो गई है।
दुनिया के पास पहले की तुलना में बड़ा buffer
संभावित खाद्य महंगाई के बीच एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि दुनिया की food supply स्थिति पिछले बड़े El Niño episodes की तुलना में मजबूत है।
Reuters के मुताबिक, वैश्विक grain inventories ऊंचे स्तर पर हैं। Brazil और Russia जैसे देशों के बड़े agricultural exporters बनने से भी global supply बढ़ी है। बेहतर irrigation, drought-resistant crops, precision agriculture और satellite-based monitoring ने किसानों की तैयारी को पहले से बेहतर किया है।
इस वजह से इस बार मजबूत El Niño का मतलब सीधे वैश्विक खाद्य संकट या भोजन की कमी होना नहीं है। वास्तविक असर मौसम की तीव्रता, फसल उत्पादन, fertilizer supply और energy prices के अगले महीनों के घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
1997-98 और 2015-16 में भी दिख चुका है असर
अतीत में भी मजबूत El Niño का कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर देखा गया है। 1997-98 और 2015-16 के El Niño episodes के दौरान कई प्रमुख फसलों का उत्पादन प्रभावित हुआ था।
उस दौरान sugar, palm oil और rice जैसी commodities की supply पर दबाव आया था और कुछ देशों में खाद्य कीमतों में तेजी देखी गई थी।
असली जोखिम मौसम और महंगी supply chain का मेल
2027 के लिए सामने आ रहा जोखिम केवल El Niño तक सीमित नहीं है। अगर मौसम की वजह से कृषि उत्पादन प्रभावित होता है और उसी समय diesel, fertilizer और food packaging की लागत भी ऊंची रहती है, तो खाद्य कीमतों पर दोहरा दबाव बन सकता है।
JPMorgan के अनुमान में इसी combination को global food inflation के लिए प्रमुख जोखिम माना गया है।