अमरनाथ यात्रा 2026 के बीच बाबा बर्फानी के प्राकृतिक हिम शिवलिंग के तेजी से पिघलने की खबर ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है। यात्रा शुरू होने के महज कुछ दिनों के भीतर शिवलिंग का आकार काफी छोटा होने की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं। कई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि हिम शिवलिंग का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड या किसी सरकारी एजेंसी ने नहीं की है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर बाबा बर्फानी इतनी तेजी से क्यों पिघल रहे हैं और इसके पीछे क्या वजह हो सकती है। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई। यात्रा के शुरुआती दिनों में ही गुफा से सामने आई तस्वीरों में प्राकृतिक हिम शिवलिंग पहले की तुलना में काफी छोटा दिखाई दे रहा है। कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि शिवलिंग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पिघल चुका है, जिससे श्रद्धालुओं में चिंता बढ़ गई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि वे वर्षों से यात्रा कर रहे हैं, लेकिन इस बार शिवलिंग का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा दिखाई दिया।
क्या है इसके पीछे की वजह
हालांकि प्रशासन या मौसम विभाग ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई अंतिम कारण नहीं बताया है, लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं—
- हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता तापमान
- कम बर्फबारी
- स्थानीय माइक्रो-क्लाइमेट में बदलाव
- गर्म हवाओं का प्रभाव
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
विशेषज्ञों का कहना है कि इन कारणों से मौसमी बर्फ और प्राकृतिक हिम संरचनाएं पहले की तुलना में तेजी से पिघल रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों से लगातार दिख रहा बदलाव
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह पहली बार नहीं है। पिछले कुछ वर्षों से बाबा बर्फानी के समय से पहले पिघलने की घटनाएं सामने आती रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पहले हिम शिवलिंग यात्रा के अधिकांश समय तक सुरक्षित रहता था, लेकिन अब कई बार यात्रा समाप्त होने से पहले ही उसका आकार काफी छोटा हो जाता है। इसे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों का संकेत भी माना जा रहा है।
श्रद्धालुओं में बढ़ी चिंता
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों के बाद कई श्रद्धालुओं ने चिंता जताई है। बड़ी संख्या में लोग जल्द से जल्द बाबा बर्फानी के दर्शन करने की इच्छा जता रहे हैं। उधर, अमरनाथ श्राइन बोर्ड यात्रा की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल यात्रा सामान्य रूप से जारी है।
क्या आधिकारिक पुष्टि हुई है
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि “90 प्रतिशत पिघलने” का दावा वायरल तस्वीरों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। अभी तक किसी सरकारी वैज्ञानिक संस्था या श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड ने हिम शिवलिंग के “90 प्रतिशत पिघलने” की आधिकारिक माप या पुष्टि सार्वजनिक नहीं की है। प्रशासन ने यात्रा रोकने जैसा कोई निर्णय भी नहीं लिया है।