दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने अनुभव और स्थानीय राजनीतिक पकड़ पर दांव खेलते हुए दो बार के पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है। सेवढ़ा से पिछला चुनाव हारने के बाद अब उनकी राजनीतिक वापसी उसी दतिया से होगी, जहां से उनके सियासी सफर की शुरुआत हुई थी। घनश्याम सिंह पहली बार 1993 में दतिया विधानसभा से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। बाद में उन्होंने अपनी सक्रिय राजनीति का केंद्र सेवढ़ा विधानसभा को बनाया। अब कांग्रेस ने एक बार फिर उन्हें उनके पुराने राजनीतिक गढ़ दतिया से चुनाव मैदान में उतारा है।
सेवढ़ा में मिली थी हार
विधानसभा चुनाव 2023 में घनश्याम सिंह ने सेवढ़ा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से 2,558 वोटों के अंतर से हार गए थे। भाजपा प्रत्याशी को 43,834 वोट (31.14%) जबकि घनश्याम सिंह को 41,276 वोट (29.32%) मिले थे। इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबले के कारण तीसरे प्रत्याशी को भी 29 हजार से अधिक वोट मिले थे।
प्रदेश नेतृत्व ने भेजा था एकमात्र नाम
सूत्रों के अनुसार, प्रदेश कांग्रेस संगठन ने दतिया उपचुनाव के लिए केंद्रीय नेतृत्व को केवल घनश्याम सिंह का नाम भेजा था। इसके बाद उनकी उम्मीदवारी पर अंतिम मुहर लग गई। टिकट वितरण के दौरान किसी अन्य नाम पर गंभीर चर्चा नहीं हुई।
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कांग्रेस को पुराने जनाधार पर भरोसा
कांग्रेस का मानना है कि घनश्याम सिंह की स्थानीय पहचान, संगठन में सक्रिय भूमिका और दतिया राजघराने से जुड़ाव उन्हें चुनावी बढ़त दिला सकता है। पार्टी इसी सामाजिक और राजनीतिक आधार को फिर से मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
भाजपा ने बदला चेहरा, कांग्रेस ने चुना अनुभव
दतिया सीट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा को हराकर यह सीट जीती थी। कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने 88,977 वोट हासिल किए थे, जबकि डॉ. नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे। दोनों के बीच जीत का अंतर 7,742 वोट रहा था। इस बार भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और विरोध भी सामने आया। कांग्रेस को उम्मीद है कि इसका चुनावी लाभ उसे मिल सकता है।
दो रणनीतियों की होगी सीधी टक्कर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव में मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दो अलग-अलग रणनीतियों के बीच होगा। भाजपा नए चेहरे के सहारे मैदान में उतरी है, जबकि कांग्रेस ने अनुभव, स्थानीय नेटवर्क और पुराने जनाधार पर भरोसा जताया है। अब चुनाव परिणाम तय करेंगे कि घनश्याम सिंह की दतिया वापसी सफल होती है या नहीं।
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