नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को ढही बहुमंजिला इमारत के बाद राहत और बचाव अभियान सोमवार को भी जारी है। करीब 50 साल पुरानी बताई जा रही यह इमारत लड़कों के PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे में अब तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि रेस्क्यू टीमों ने कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला है।
6 लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
AIIMS के मुताबिक, हादसे के बाद 11 घायल मरीज ट्रॉमा सेंटर लाए गए। इनमें पांच को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित किया गया, जबकि गंभीर हालत में भर्ती एक अन्य मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तीन मरीज अभी इलाज के लिए भर्ती हैं और एक मरीज की घायल अंग की सर्जरी की गई है। मामूली चोट वाले एक मरीज को निगरानी के बाद छुट्टी दे दी गई।
रेस्क्यू के आंकड़े अलग-अलग समय पर अपडेट हुए हैं। सुबह के एक अपडेट में 13 लोगों को मलबे से निकाले जाने की जानकारी दी गई, जबकि कुछ रिपोर्टों में 11 लोगों के रेस्क्यू का आंकड़ा दिया गया था। इसलिए राहत अभियान के दौरान संख्या लगातार अपडेट होती रही है।
रातभर मलबे में तलाश, स्निफर डॉग्स की मदद
हादसे के बाद NDRF, दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की टीमें मौके पर तैनात हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी रात जारी रहा।
NDRF की टीमें प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स और लाइफ डिटेक्शन उपकरणों की मदद से मलबे के अलग-अलग हिस्सों में संभावित जीवित लोगों और पीड़ितों की तलाश कर रही हैं।
भारी मलबे के बीच मशीनों से रास्ता बनाने के साथ-साथ कई जगहों पर सावधानी से मलबा हटाया जा रहा है, ताकि अंदर फंसे किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
कैसे हुआ हादसा
हादसा रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित यह इमारत लड़कों के PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के हिस्से में मरम्मत या निर्माण से जुड़ा काम चल रहा था।
हालांकि, इमारत गिरने की अंतिम और आधिकारिक वजह अभी जांच का विषय है। शुरुआती जांच में निर्माण/मरम्मत कार्य, इमारत की संरचनात्मक स्थिति और कथित अनधिकृत निर्माण जैसे पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
मालिक समेत अन्य के खिलाफ FIR
पुलिस ने हादसे के मामले में इमारत के कथित मालिक हरिराम और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। रिपोर्टों के अनुसार मामला साउथ कैंपस थाने में दर्ज किया गया है और जांच के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं।
पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि इमारत में किस तरह का निर्माण या मरम्मत कार्य चल रहा था, उसकी अनुमति थी या नहीं और क्या किसी तरह की लापरवाही ने ढांचे को कमजोर किया।
इमारत में पहले से थीं दरारें
हादसे के बाद इमारत की संरचनात्मक स्थिति को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्टों में हादसे से पहले इमारत में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। साथ ही कथित तौर पर बेसमेंट में काम और पानी जमा होने जैसी परिस्थितियों की भी जांच की जा रही है।
हालांकि, इन परिस्थितियों को हादसे का अंतिम कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पास की दूसरी इमारत भी खतरनाक मिली
हादसे के बाद प्रशासन की चिंता केवल गिरी हुई इमारत तक सीमित नहीं रही। MCD ने हादसे से सटी बिल्डिंग/हाउस नंबर 13 को जर्जर और खतरनाक बताते हुए उसे खाली कराने का आदेश दिया है।
MCD के नोटिस के मुताबिक, इमारत को निर्धारित समय में गिराने का आदेश दिया गया है। आदेश का पालन नहीं होने पर निगम खुद कार्रवाई कर सकता है और खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूलने की बात कही गई है।
मलबा हटाने के दौरान आसपास की इमारतों की स्थिरता पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि भारी मलबा हटाने से आसपास के ढांचे पर असर पड़ने की आशंका है।
चार मंजिल से ज्यादा वाली अवैध इमारतों पर कार्रवाई
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने दिल्ली में चार मंजिल से ज्यादा वाली अवैध निर्माण वाली इमारतों को सील करने के निर्देश दिए हैं।
MCD की कार्रवाई का फोकस ऐसे निर्माणों पर है जो स्वीकृत नक्शे या निर्धारित नियमों के विपरीत बनाए गए हैं। अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है और लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
कितनी पुरानी थी इमारत
गिरी हुई इमारत की उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग आंकड़े सामने आए हैं। कुछ रिपोर्ट इसे करीब 40 से 50 साल पुरानी बताती हैं, जबकि MCD से जुड़े विवरणों में इसके निर्माण को 1990 के दशक से जोड़कर करीब 30 साल पुराना बताया गया है।
इसलिए फिलहाल इसकी सटीक उम्र को लेकर किसी एक आंकड़े को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
MCD के अनुसार, यह संपत्ति करीब 55 वर्ग गज क्षेत्र में बनी थी और वहां ग्राउंड फ्लोर के अलावा कई मंजिलें थीं। पुनर्वास कॉलोनी में स्वीकृत निर्माण सीमा और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर की भी जांच की जा रही है।
छात्रों के PG में रहने पर उठे सुरक्षा सवाल
सत्य निकेतन और आसपास का इलाका बड़ी संख्या में छात्रों के PG में रहने के लिए जाना जाता है। हादसे के बाद ऐसे आवासों की संरचनात्मक सुरक्षा, निर्माण नियमों और आपातकालीन निकास को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि हादसे वाली इमारत में पर्याप्त आपातकालीन निकास और अन्य सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ऐसी इमारतों में बड़ी संख्या में छात्र और किरायेदार रहते हैं।
CCTV में कैद हुआ हादसे का खौफनाक पल
हादसे का CCTV फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में दिखाई देता है कि इमारत अचानक भरभराकर गिरती है और कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका धूल के गुबार से ढक जाता है।
CCTV सामने आने के बाद हादसे की भयावहता का अंदाजा और साफ हुआ है। पुलिस और प्रशासन अब उपलब्ध फुटेज समेत अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रहे हैं।
मलबे में और कौन फंसा है
फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में किसी और व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को खत्म करना है। रेस्क्यू टीमें लगातार अलग-अलग हिस्सों की जांच कर रही हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, जब तक मलबे की पूरी तरह तलाशी नहीं हो जाती, सर्च ऑपरेशन जारी रहेगा। इसके साथ ही अस्पतालों में भर्ती घायलों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है।
हादसे के अब तक के बड़े अपडेट
- 6 लोगों की मौत की पुष्टि।
- 13 लोगों के रेस्क्यू की जानकारी सामने आई; अलग-अलग अपडेट में संख्या बदलती रही है।
- AIIMS में 11 मरीज लाए गए थे; तीन अभी इलाजरत हैं।
- NDRF, पुलिस और फायर टीमों का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।
- मलबे में तलाश के लिए स्निफर डॉग्स और लाइफ डिटेक्टर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
- इमारत मालिक हरिराम समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज।
- मजिस्ट्रियल जांच के आदेश।
- पास की जर्जर इमारत को खाली कराने और गिराने का आदेश।
- चार मंजिल से ज्यादा वाली अवैध इमारतों पर सीलिंग की कार्रवाई के निर्देश।
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