देश में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर जारी बहस के बीच ऊर्जा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति का समर्थन किया है। दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी जल्दबाजी में नहीं, बल्कि वर्षों की वैज्ञानिक तैयारी, तकनीकी परीक्षण और व्यापक विचार-विमर्श के बाद लागू किया गया है।
कौन हैं वर्तिका शुक्ला
प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुरुआती वक्तव्य वर्तिका शुक्ला ने दिया। वह इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (Engineers India Limited – EIL) की पूर्व चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक (CMD) रह चुकी हैं और ऊर्जा, रिफाइनिंग तथा जैव ईंधन (Biofuel) क्षेत्र की वरिष्ठ विशेषज्ञ मानी जाती हैं। उन्होंने तीन दशक से अधिक समय तक ऊर्जा क्षेत्र में काम किया है और कई राष्ट्रीय परियोजनाओं से जुड़ी रही हैं।
‘रातोंरात नहीं बना एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम’
वर्तिका शुक्ला ने कहा कि भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम अचानक लागू नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में देश में पेट्रोल में केवल करीब 1.5 प्रतिशत एथेनॉल मिलाया जाता था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से मिश्रण बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया और दिसंबर 2025 तक E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण) का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर लिया गया।
उनके अनुसार वर्ष 2018 से इस कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया गया और नीति तैयार करने से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की गई।
वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लिया गया फैसला
वर्तिका शुक्ला ने कहा कि E20 कार्यक्रम को लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और तकनीकी एजेंसियों ने व्यापक परीक्षण किए। उन्होंने बताया कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) जैसे संस्थानों ने भी परीक्षणों में भाग लिया।
उनका कहना था कि यह नीति दुनिया के उन देशों की तर्ज पर तैयार की गई है, जो जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए एथेनॉल मिश्रण का उपयोग कर रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी रखा पक्ष
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर मोटर, हुंडई मोटर इंडिया, टीवीएस मोटर कंपनी और हीरो मोटोकॉर्प सहित कई प्रमुख वाहन निर्माताओं के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि E20 ईंधन को ध्यान में रखकर नए वाहनों का परीक्षण किया गया है और यह निर्धारित मानकों के अनुरूप सुरक्षित है।
E20 को लेकर विवाद क्यों
हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ सार्वजनिक मंचों पर E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह के दावे सामने आए। इनमें इंजन पर असर, माइलेज में कमी और पानी की खपत जैसे मुद्दे शामिल रहे। इन दावों के बाद सरकार और उद्योग जगत ने स्पष्ट किया कि कई जानकारियां अधूरी या भ्रामक हैं और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर ही E20 कार्यक्रम लागू किया गया है।
सरकार का उद्देश्य क्या है
केंद्र सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कई फायदे हैं।
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी।
- गन्ना और अन्य फसलों से जुड़े किसानों की आय बढ़ेगी।
- हरित ईंधन (Green Fuel) को बढ़ावा मिलेगा।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
भारत सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में एथेनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और तेल विपणन कंपनियों के माध्यम से मिश्रित ईंधन की आपूर्ति का दायरा लगातार बढ़ाया है।
क्या सभी वाहन E20 के लिए उपयुक्त हैं
विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के वर्षों में लॉन्च किए गए अधिकांश नए वाहन E20 अनुकूल (E20 Compatible) बनाए जा रहे हैं। हालांकि पुराने वाहनों के संबंध में वाहन निर्माता की सलाह का पालन करना उचित रहेगा। वाहन मालिकों को अपने मॉडल के अनुसार कंपनी द्वारा जारी दिशा-निर्देश देखने चाहिए।