मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ऑनलाइन निवेश करने वालों की चिंता बढ़ा दी है। 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को हाई रिटर्न का लालच देकर साइबर ठगों ने करीब छह महीने तक अपने जाल में फंसाए रखा और 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम हड़प ली। पुलिस इसे प्रदेश के सबसे बड़े ऑनलाइन निवेश साइबर फ्रॉड मामलों में से एक मान रही है। ऐसे में यह घटना हर निवेशक के लिए बड़ी चेतावनी है कि बिना जांच-पड़ताल के किसी भी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर भरोसा करना कितना भारी पड़ सकता है।
कैसे शुरू हुआ पूरा खेल
पुलिस के अनुसार, करीब छह महीने पहले 70 वर्षीय चार्टर्ड अकाउंटेंट के मोबाइल पर एक अनजान व्यक्ति ने संपर्क किया। शुरुआत सामान्य बातचीत से हुई। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन निवेश से कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया गया।
ठगों ने एक कथित निवेश प्लेटफॉर्म का लिंक भेजा और दावा किया कि यहां शेयर, क्रिप्टो और अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश कर मोटा रिटर्न कमाया जा सकता है। विश्वास जीतने के लिए शुरुआती निवेश पर उन्हें ऐप और वेबसाइट में अच्छा-खासा मुनाफा भी दिखाया गया। यही वह मनोवैज्ञानिक तरीका है, जिसका इस्तेमाल साइबर ठग अक्सर अपने शिकार को भरोसे में लेने के लिए करते हैं।
फर्जी पोर्टल पर दिखता रहा करोड़ों का मुनाफा
जांच में सामने आया कि जिस निवेश प्लेटफॉर्म पर पीड़ित पैसा लगा रहे थे, वह कथित तौर पर फर्जी था।
पीड़ित जब भी पैसा जमा करते, वेबसाइट पर उनका बैलेंस और मुनाफा बढ़ता हुआ दिखाई देता था। इससे उन्हें लगा कि उनका निवेश तेजी से बढ़ रहा है। इसी भरोसे में उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों में कई बार बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक छह महीने के दौरान 100 से अधिक ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ठगों तक पहुंच गई।
ठगी का पता कब चला?
मामला तब सामने आया, जब पीड़ित ने निवेश की रकम निकालने की कोशिश की।कथित कस्टमर केयर और निवेश सलाहकारों ने कहा कि पहले टैक्स, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज जमा करने होंगे। जब लगातार नई-नई रकम मांगी जाने लगी और भुगतान के बावजूद पैसा वापस नहीं मिला, तब उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस की जांच में क्या सामने आया
ग्वालियर साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ठगी की रकम अलग-अलग बैंक खातों में भेजी गई। पुलिस डिजिटल ट्रेल, बैंक खातों, मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस की जांच कर रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच एजेंसियां अब तक करीब 1.75 करोड़ रुपये फ्रीज कराने में सफल रही हैं। बाकी रकम का पता लगाने और आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास जारी हैं।
क्यों खतरनाक है यह साइबर ठगी?
साइबर अपराधी अब सिर्फ कम पढ़े-लिखे लोगों को नहीं, बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, कारोबारी और रिटायर्ड अधिकारियों को भी निशाना बना रहे हैं। वे पहले भरोसा जीतते हैं, फिर नकली ऐप और वेबसाइट पर काल्पनिक मुनाफा दिखाकर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाते हैं। इसे विशेषज्ञ Investment Scam या Pig Butchering Scam जैसी ठगी की श्रेणी में भी रखते हैं, जिसमें पहले विश्वास बनाया जाता है और फिर लंबे समय तक निवेश करवाकर बड़ी रकम हड़प ली जाती है।