हनुमना सोलर प्लांट में विद्युत उपकरणों की गड़बड़ी का खुलासा, पत्नी के नाम फर्म से काम कराने वाले JE निलंबित; कई कंपनियों की सामग्री जांच के दायरे में

रीवा। मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमपीईजेड) के रीवा सर्किल से जुड़े एक मामले में सीधी जिले में पदस्थ जूनियर इंजीनियर रंजीत कुमार साहू को निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपनी पत्नी के नाम पंजीकृत फर्म के माध्यम से हनुमना में बन रहे 2 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र के कार्य में भूमिका निभाई। प्रारंभिक जांच में उनकी संलिप्तता सामने आने के बाद कंपनी प्रबंधन ने यह कार्रवाई की है।

शिकायत के बाद बनी जांच समिति

विद्युत उपकरणों और विभिन्न विद्युत कंपनियों की सामग्री के संभावित दुरुपयोग की शिकायत मिलने पर मुख्य अभियंता (प्रवर्तन) रीवा ने जांच समिति गठित की। समिति ने स्थल निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज कर विस्तृत जांच की।

पत्नी के नाम दर्ज है ओम एंटरप्राइजेज

जांच में सामने आया कि हनुमना स्थित 2 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र के विद्युत संयोजन और लाइन विस्तार का कार्य मेसर्स ओम एंटरप्राइजेज को दिया गया था। इस फर्म की प्रोपराइटर ममता कुमारी हैं, जो निलंबित जूनियर इंजीनियर रंजीत कुमार साहू की पत्नी हैं।

इसी आधार पर जांच समिति ने प्रथम दृष्टया हितों के टकराव (Conflict of Interest) और अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए उनकी संलिप्तता का उल्लेख किया।

जांच में क्या-क्या मिला

जांच के दौरान लगाए गए विद्युत उपकरणों और सामग्री के परीक्षण में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए—

  • कुछ उपकरणों पर मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का नाम अंकित मिला।
  • कंट्रोल केबल पर मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का उल्लेख पाया गया।
  • एक वीसीबी (Vacuum Circuit Breaker) की नेम प्लेट पर खरीदार (Buyer) से संबंधित विवरण मिटा हुआ मिला।
  • इन सभी तथ्यों के अभिलेखीय सत्यापन के लिए संबंधित कंपनियों से जानकारी मांगी गई है।

जेई को किया गया निलंबित

प्राथमिक जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालन अभियंता (एसटीएम/एसटीसी) संभाग सीधी में पदस्थ रंजीत कुमार साहू को 25 जून के आदेश के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय अधीक्षण अभियंता (संचालन/संधारण) कार्यालय, उमरिया निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

अंतिम कार्रवाई जांच रिपोर्ट के बाद

कंपनी प्रबंधन का कहना है कि मामले में उपयोग की गई सामग्री और उपकरणों का संबंधित विद्युत कंपनियों से रिकॉर्ड के आधार पर सत्यापन कराया जा रहा है। जांच पूरी होने और अंतिम रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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