सनातन धर्म में हरितालिका तीज को माता पार्वती और भगवान शिव के मिलन का पावन पर्व माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखती हैं, जबकि अविवाहित कन्याएं योग्य वर की कामना से यह व्रत करती हैं। हरितालिका तीज का निर्जला व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है।
हरितालिका तीज 2026 कब है
वर्ष 2026 में हरितालिका तीज 15 सितंबर (मंगलवार) को मनाई जाएगी। यह पर्व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आता है।
नोट: अंतिम पूजा मुहूर्त और तिथि स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा भिन्न हो सकते हैं। प्रकाशन के समय अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय अपडेट कर दें।
हरितालिका तीज क्यों मनाई जाती है
पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करना चाहती थीं। लेकिन उनके पिता हिमवान उनका विवाह भगवान विष्णु से कराना चाहते थे। तब पार्वती की सखी उन्हें वन में ले गईं। वहीं माता पार्वती ने कठोर तपस्या और निर्जला व्रत किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
इसी घटना के कारण इस व्रत का नाम ‘हरितालिका’ पड़ा। ‘हरित’ का अर्थ है हर लेना और ‘आलिका’ का अर्थ है सखी।
हरितालिका तीज का धार्मिक महत्व
- अखंड सौभाग्य की प्राप्ति।
- पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि।
- दांपत्य जीवन में प्रेम और विश्वास।
- अविवाहित कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी मिलने की कामना।
- परिवार में सुख, शांति और समृद्धि।
हरितालिका तीज व्रत की पूजा विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें।
- स्वच्छ एवं पारंपरिक वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें।
- भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, रोली, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
- हरितालिका तीज व्रत कथा सुनें।
- शिव-पार्वती की आरती करें।
- रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का भी विशेष महत्व माना जाता है।
पूजा सामग्री
- भगवान शिव एवं माता पार्वती की प्रतिमा
- भगवान गणेश की प्रतिमा
- बेलपत्र
- फूल और माला
- चंदन
- रोली
- अक्षत
- धूप-दीप
- घी का दीपक
- नारियल
- मौसमी फल
- मिठाई
- पंचामृत
- सुपारी
- कलश
- लाल या पीला वस्त्र
हरितालिका तीज पर क्या करें
- भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त पूजन करें।
- सुहाग सामग्री अर्पित करें।
- जरूरतमंदों को दान दें।
- बुजुर्गों का आशीर्वाद लें।
- सात्विक भोजन का पालन करें (यदि व्रत नियम अनुसार हो)।
क्या नहीं करना चाहिए
- क्रोध और विवाद से बचें।
- झूठ न बोलें।
- तामसिक भोजन और नशे से दूर रहें।
- पूजा के समय मन में नकारात्मक विचार न रखें।
- व्रत का संकल्प लेने के बाद नियमों का पालन करें।
हरितालिका तीज की संक्षिप्त कथा
कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पार्वती को पत्नी के रूप में स्वीकार किया। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और मनोवांछित वर की प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से व्रत करने पर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: हरितालिका तीज का व्रत कौन रख सकता है?
उत्तर: सुहागिन महिलाएं, अविवाहित कन्याएं और कई स्थानों पर पुरुष भी श्रद्धा से यह व्रत रखते हैं।
प्रश्न: क्या यह निर्जला व्रत होता है?
उत्तर: परंपरागत रूप से इसे निर्जला व्रत माना जाता है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कारणों से अपने सामर्थ्य और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।
प्रश्न: हरितालिका तीज पर किसकी पूजा होती है?
उत्तर: भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है।