बारिश में बंद हो जाता है झीलढाना का स्कूल रास्ता, बच्चे परेशान

छिंदवाड़ा। डिजिटल डेस्क

छिंदवाड़ा जिले में एक गांव ऐसा भी है, जहां बारिश शुरू होते ही बच्चों की पढ़ाई पर ब्रेक लग जाता है। मोहखेड़ विकासखंड के झीलढाना गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। बारिश में नदी उफान पर आने से रास्ता बंद हो जाता है और कई-कई दिनों तक बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते।

गांव में स्कूल नहीं, दूसरे विकासखंड जाना मजबूरी

ग्वारा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाला झीलढाना गांव घने जंगल के बीच बसा है। सारंगबिहरी से करीब आठ किलोमीटर दूर इस बस्ती में लगभग 25 से 30 मकान हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक गांव में न स्कूल है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के लिए पड़ोसी बिछुआ विकासखंड के गुलसी और सालईढाना गांव जाना पड़ता है।

प्राथमिक और मिडिल स्तर की पढ़ाई के लिए बच्चों को करीब दो किलोमीटर का कच्चा रास्ता तय करना पड़ता है। इसके बाद उन्हें नदी पार करके स्कूल पहुंचना होता है।

बारिश में नदी बन जाती है सबसे बड़ी बाधा

सामान्य दिनों में बच्चे किसी तरह नदी पार कर स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन बारिश के दौरान स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। लगातार बारिश से नदी में पानी बढ़ने पर रास्ता जोखिम भरा हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बच्चे लगातार आठ-आठ दिन तक स्कूल नहीं जा पाते। नदी में पानी रहने तक उनका स्कूल जाना लगभग बंद हो जाता है।

इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। खासकर पांचवीं और आठवीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए आवागमन की समस्या और बढ़ जाती है।

गुलसी और सालईढाना के स्कूलों में जाते हैं बच्चे

झीलढाना के बच्चे प्राथमिक शिक्षा के लिए सालईढाना और मिडिल स्कूल की पढ़ाई के लिए गुलसी गांव पहुंचते हैं। दोनों जगह जाने के लिए उन्हें गांव से बाहर निकलकर कच्चे रास्ते से नदी तक जाना पड़ता है।

बारिश के दिनों में यही रास्ता बच्चों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। नदी में तेज बहाव के कारण अभिभावक भी बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं।

बीमार और गर्भवती महिलाओं को भी परेशानी

झीलढाना में सड़क और परिवहन की समस्या का असर केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। गांव में किसी व्यक्ति के बीमार होने या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ने पर ग्रामीणों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों के अनुसार एंबुलेंस और चौपहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते। ऐसी स्थिति में मरीज या गर्भवती महिला को खटिया पर लिटाकर करीब दो किलोमीटर तक कच्चे रास्ते से ले जाना पड़ता है।

इसके बाद नदी पार कर गुलसी गांव के मुख्य मार्ग तक पहुंचाया जाता है, जहां से वाहन की व्यवस्था कर अस्पताल ले जाने का प्रयास किया जाता है।

बारिश में गांव का संपर्क प्रभावित

ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और नदी पर सुरक्षित रास्ते की सुविधा नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में झीलढाना की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।

एक तरफ बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है, वहीं दूसरी ओर स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं के लिए भी ग्रामीणों को दूसरे गांव पर निर्भर रहना पड़ता है।

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