श्योपुर। डिजिटल डेस्क — मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव संरक्षण के लिए अच्छी खबर सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार नए शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ देश में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। इनमें 36 चीते भारत में जन्मे हैं।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि KGP12 खुद भारत में जन्मी चीता है। वह दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता गामिनी की संतान है। अब भारत में जन्मी चीता की अगली पीढ़ी भी कूनो में जन्म ले रही है।
चार साल पूरे होने के बाद कूनो से खुशखबरी
भारत में प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। नामीबिया से लाए गए आठ चीतों के साथ इस अभियान की शुरुआत हुई थी। बाद में दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते भारत लाए गए।
प्रोजेक्ट चीता के चार साल पूरे होने के ठीक बाद कूनो में चार शावकों का जन्म हुआ है। यह घटनाक्रम कार्यक्रम के उस चरण को दिखाता है, जिसमें भारत में लाए गए चीतों के साथ-साथ उनकी देश में जन्मी संतानों की संख्या भी बढ़ रही है।
कूनो में 53, गांधी सागर में 3 चीते
नए शावकों के जन्म के बाद भारत में कुल चीतों की संख्या 56 हो गई है। इनमें 53 चीते कूनो नेशनल पार्क में हैं, जबकि 3 चीते गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में मौजूद हैं। देश में जन्मे चीतों की संख्या अब 36 हो गई है।
इससे पहले सितंबर 2026 में पर्यावरण मंत्रालय की समीक्षा में भारत में चीतों की संख्या 52 बताई गई थी। उस समय सरकार ने बताया था कि कूनो और गांधी सागर में चीतों के लिए संरक्षित आवास का क्षेत्र 3,428 वर्ग किलोमीटर तक बढ़ाया गया है।
भारत में जन्मी चीता अब दे रही अगली पीढ़ी
KGP12 का शावकों को जन्म देना प्रोजेक्ट चीता के लिए खास घटनाक्रम है। इसका जन्म भारत में ही हुआ था और अब वह खुद मां बन चुकी है।
इससे यह संकेत मिलता है कि भारत में पुनर्स्थापित किए जा रहे चीतों की आबादी केवल बाहर से लाए गए जानवरों तक सीमित नहीं रह रही, बल्कि देश में जन्मी पीढ़ियां भी प्रजनन चक्र का हिस्सा बन रही हैं। हालांकि किसी संरक्षण कार्यक्रम की दीर्घकालिक सफलता का आकलन केवल संख्या बढ़ने से नहीं, बल्कि शावकों के जीवित रहने, प्रजनन और स्थायी आबादी बनने जैसे कई मानकों से किया जाता है।
कूनो के बाद बढ़ा संरक्षण का दायरा
सरकार के अनुसार प्रोजेक्ट चीता का उद्देश्य भारत में चीते की व्यवहार्य और लंबे समय तक टिकाऊ आबादी स्थापित करना है। इसके लिए कूनो के अलावा गांधी सागर तथा भविष्य में अन्य उपयुक्त घासभूमि क्षेत्रों को भी विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है।