नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में वैश्विक समुद्री सुरक्षा और नाविकों की मदद के लिए ‘Seafarers’ Emergency Support Network’ बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि सुरक्षित समुद्री मार्ग और निर्बाध सप्लाई रूट वैश्विक व्यापार के लिए बेहद जरूरी हैं।
समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक व्यापार की सुचारु गति के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय संघर्षों के कारण दुनिया के कई महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ा है।
मोदी ने इसी संदर्भ में BRICS देशों के बीच ‘Seafarers’ Emergency Support Network’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य समुद्र में संकट में फंसे नाविकों को विभिन्न देशों के बीच समन्वय के जरिए समय पर सहायता उपलब्ध कराना है।
संकट के समय मिलेगी त्वरित मदद
प्रस्तावित नेटवर्क में आपात स्थिति में डिस्ट्रेस अलर्ट, चिकित्सा सहायता, परिवारों से संपर्क और जरूरत पड़ने पर निकासी जैसी सुविधाओं के लिए समन्वित व्यवस्था विकसित करने की बात सामने आई है। इससे संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले नाविकों को तेजी से मदद पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
पश्चिम एशिया और ब्लैक सी के हालात के बीच प्रस्ताव
मोदी का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया और ब्लैक सी जैसे क्षेत्रों में संघर्ष और सुरक्षा जोखिमों के कारण समुद्री परिवहन प्रभावित हुआ है। भारतीय समुद्री कार्यबल की बड़ी हिस्सेदारी को देखते हुए नाविकों की सुरक्षा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वैश्विक समुद्री कार्यबल में 12 प्रतिशत से अधिक योगदान देता है और तीन लाख से ज्यादा भारतीय नाविक सक्रिय रूप से समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ऐसे में आपातकालीन अंतरराष्ट्रीय समन्वय की व्यवस्था भारतीय नाविकों के लिए भी अहम हो सकती है।
BRICS के जरिए वैश्विक सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री ने BRICS सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने Global South को केवल नियमों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि rule shaper बनने की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।
भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान रखे गए इस प्रस्ताव को समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और वैश्विक व्यापार की निरंतरता से जोड़कर देखा जा रहा है।