गलवान के बाद पहली बड़ी मुलाकात, मोदी-शी ने 50 मिनट की बातचीत में रिश्तों की नई राह पर की चर्चा

ई दिल्ली। डिजिटल डेस्क

गलवान घाटी में वर्ष 2020 में हुए सैन्य संघर्ष के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को पहली बड़ी द्विपक्षीय मुलाकात हुई। नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान करीब 50 मिनट चली बातचीत में दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति और स्थिरता के साथ भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने, व्यापार और आपसी सहयोग के मुद्दों पर चर्चा की।

मोदी ने सीमा पर शांति को बताया जरूरी

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत-चीन संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बेहद जरूरी है। दोनों नेताओं ने सीमा से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए पहले हुए समझौतों और सहमतियों का पालन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

मोदी ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलना चाहिए। भारत की ओर से रिश्तों के लिए पारस्परिक सम्मान, पारस्परिक संवेदनशीलता और पारस्परिक हित को महत्वपूर्ण आधार बताया गया।

शी ने रिश्तों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखने पर दिया जोर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि चीन भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखता है। उन्होंने दोनों देशों से एक-दूसरे की ताकत से सीखने, सहयोग बढ़ाने और साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही।

शी ने भारत और चीन को ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण देशों के रूप में बताते हुए दोनों देशों के बीच उच्च गुणवत्ता वाले सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया।

व्यापार और निवेश पर भी हुई चर्चा

बैठक में आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार असंतुलन, बाजार तक पहुंच, सप्लाई चेन और निवेश से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। साथ ही कारोबारी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।

भारत और चीन के बीच व्यापार में हाल के वर्षों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन व्यापार घाटा भारत के लिए लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। ऐसे में बैठक में आर्थिक संबंधों को अधिक संतुलित बनाने पर चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सात साल बाद भारत आए शी जिनपिंग

शी जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हुई है। उनकी यात्रा और मोदी के साथ बैठक को 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है।

हालांकि सीमा से जुड़े कई मुद्दे अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव कम होने के बाद व्यापार, सीधी उड़ानों और अन्य क्षेत्रों में संपर्क बहाल करने की कोशिशें तेज हुई हैं।

BRICS के मंच से रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश

नई दिल्ली में हुई यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन के दौरान चीन को अगले वर्ष की अध्यक्षता सौंपी जाएगी। दोनों नेताओं की बैठक को BRICS के व्यापक मंच के साथ-साथ भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *