नई दिल्ली। डिजिटल डेस्क
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों की नीतियों को लेकर कड़ा बयान दिया। उन्होंने यूरोपीय देशों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर विदेशी सैनिक यूक्रेन भेजे जाते हैं तो इसे रूस के साथ युद्ध के रूप में देखा जाएगा।
‘यूक्रेन में सैनिक भेजना रूस से युद्ध होगा’
BRICS सम्मेलन से इतर मीडिया से बातचीत में पुतिन ने यूरोपीय देशों द्वारा यूक्रेन में सैनिक भेजे जाने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि रूस यूरोपीय देशों को धमकी नहीं दे रहा है और उसके पास यूरोप के साथ संघर्ष का कोई आधार नहीं है।
हालांकि, पुतिन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती रूस के साथ युद्ध का मतलब होगी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन की सुरक्षा के लिए संभावित अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी और यूरोपीय देशों की भूमिका को लेकर चर्चा जारी है।
पश्चिमी प्रतिबंधों पर भी पुतिन का हमला
इससे पहले BRICS Business Forum में पुतिन ने रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों को लेकर भी तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने दावा किया कि रूस पर 30 हजार से अधिक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं और पश्चिमी देश अपनी आर्थिक स्थिति बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा के “कुरूप” तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
पुतिन ने परिवहन गलियारों को बाधित करने, पाइपलाइन और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने तथा समुद्री जहाजों को रोकने जैसी घटनाओं का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, आर्थिक प्रतिस्पर्धा अब कई जगह पारंपरिक व्यापारिक उपायों से आगे बढ़ गई है।
G7 पर भी साधा निशाना
पुतिन ने BRICS की बढ़ती आर्थिक ताकत का जिक्र करते हुए G7 पर भी तंज कसा। उन्होंने BRICS देशों की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी को रेखांकित करते हुए सवाल उठाया कि G7 को अभी भी उसी नाम से क्यों संबोधित किया जाता है।
पुतिन का तर्क है कि BRICS देशों की आर्थिक और राजनीतिक भूमिका लगातार बढ़ रही है और समूह वैश्विक विकास के लिए पश्चिमी प्रभुत्व से अलग एक नए मंच के रूप में उभर सकता है।
BRICS को बताया वैश्विक सहयोग का मंच
BRICS सम्मेलन में पुतिन ने समूह के भीतर सहयोग को समानता, अच्छे पड़ोसी संबंधों और एक-दूसरे के हितों के सम्मान पर आधारित बताया। उन्होंने कहा कि BRICS की वैश्विक विश्वसनीयता और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
रूस BRICS के जरिए पश्चिमी आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के विकल्प के तौर पर बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बढ़ावा देने की वकालत करता रहा है। नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में भी यह मुद्दा प्रमुख रहा।
भारत में हुई मोदी-पुतिन मुलाकात भी अहम
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन के बीच भी मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करने तथा व्यापार, रक्षा, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
BRICS के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में भी सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद, परामर्श और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात दोहराई है।
पुतिन के ताजा बयानों से स्पष्ट है कि रूस BRICS मंच का इस्तेमाल न केवल आर्थिक सहयोग बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन और पश्चिमी नीतियों पर अपनी स्थिति रखने के लिए भी कर रहा है।