नागद्वारी यात्रा प्लास्टिक मुक्त, पानी की बोतल बिक्री पर रोक

छिंदवाड़ा। पचमढ़ी की दुर्गम पहाड़ियों में शुरू हुई नागद्वारी यात्रा इस बार आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दे रही है। जंगल और पहाड़ी क्षेत्र को प्लास्टिक कचरे से बचाने के लिए वन विभाग ने सख्ती बढ़ाई है। पचमढ़ी के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आयोजित विश्व प्रसिद्ध नागद्वारी यात्रा शनिवार से शुरू हो गई है। यात्रा 8 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक चलेगी। इस बार वन विभाग ने यात्रा को प्लास्टिक मुक्त रखने पर विशेष जोर दिया है। मेला मार्ग पर अस्थाई रूप से लगने वाली दुकानों में पानी की प्लास्टिक बोतल बेचने पर रोक लगाई गई है। दुकानों की जांच के लिए वन विभाग की टीमों को सक्रिय किया गया है। इसका उद्देश्य यात्रा मार्ग और आसपास के जंगलों में प्लास्टिक कचरे को फैलने से रोकना है।

श्रद्धालुओं के लिए पानी की वैकल्पिक व्यवस्था

पानी की बोतलों की बिक्री पर रोक के बावजूद श्रद्धालुओं को पेयजल की परेशानी न हो, इसके लिए जगह-जगह पानी की व्यवस्था की गई है। बड़े द्वार सहित प्रमुख स्थानों पर RO मशीन भी लगाई गई हैं। धार्मिक मंडलों की ओर से भी यात्रा मार्ग में जगह-जगह भंडारे और पेयजल की व्यवस्था की गई है।

खास बात यह है कि श्रद्धालुओं के पास पहले से मौजूद पानी की बोतल लेकर जाने पर रोक नहीं है। इन बोतलों का इस्तेमाल प्राकृतिक झरनों से पानी भरने के लिए किया जा सकता है।

10 दिन के लिए खुलता है दुर्गम वन क्षेत्र

सतपुड़ा की पहाड़ियों में स्थित नागद्वारी क्षेत्र अपनी प्राकृतिक गुफाओं और धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थित गुफाओं और प्रतिमाओं को श्रद्धालु आस्था का केंद्र मानते हैं।

नागद्वारी यात्रा साल में एक बार सीमित अवधि के लिए आयोजित होती है। 2026 में यात्रा 8 अगस्त से शुरू होकर 17 अगस्त यानी नागपंचमी तक चलेगी। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। पिछले वर्ष भी करीब 5 लाख श्रद्धालुओं ने नागद्वारी में दर्शन किए थे। इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

रोमांचक ट्रेकिंग और आस्था का संगम

नागद्वारी की यात्रा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों और जंगलों से गुजरने वाली यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए रोमांचक ट्रेकिंग का अनुभव भी देती है।

पथरीले रास्ते, चट्टानों की चढ़ाई और बारिश के बीच बादलों से घिरी पहाड़ियां यात्रा को और चुनौतीपूर्ण बना देती हैं। इसी वजह से नागद्वारी को कई लोग ‘मध्य प्रदेश का अमरनाथ’ भी कहते हैं।

महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु

नागद्वारी यात्रा में मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई धार्मिक मंडल यात्रा मार्ग में नि:शुल्क भोजन और पानी की व्यवस्था करते हैं।

भंडारों में जलेबी, इमरती, ढोकला, इडली समेत अलग-अलग तरह के व्यंजन श्रद्धालुओं को नि:शुल्क परोसे जाते हैं। इससे कठिन यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को काफी राहत मिलती है।

पचमढ़ी की इस धार्मिक यात्रा में प्रशासन और वन विभाग की कोशिश इस बार यही है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ सतपुड़ा का प्राकृतिक पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।

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