किले की सुरक्षा ध्वस्त, अंतरराष्ट्रीय तस्करों के निशाने पर MP की धरोहर
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले स्थित ऐतिहासिक नरवर किले से 16वीं सदी की एक दुर्लभ तोप चोरी होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि 15-16 जुलाई की दरम्यानी रात 25 से 30 हथियारबंद बदमाश लोडिंग वाहन लेकर किले में घुसे, सुरक्षाकर्मियों को धमकाकर भगा दिया और सदियों पुरानी ऐतिहासिक तोप अपने साथ ले गए।
रात के अंधेरे में कैसे हुई वारदात
जानकारी के अनुसार बदमाश किले के पिछले रास्ते से लोडिंग वाहन लेकर अंदर पहुंचे। उस समय ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को हथियार दिखाकर जान से मारने की धमकी दी गई। विरोध करने की स्थिति नहीं होने पर सुरक्षाकर्मी वहां से हट गए, जिसके बाद बदमाश ओपन कचहरी में रखी ऐतिहासिक तोप लेकर फरार हो गए।
किले में थीं 14 ऐतिहासिक तोपें, अब बचीं 13
नरवर किले की ओपन कचहरी में सिंधिया काल की कुल 14 ऐतिहासिक तोपें रखी गई थीं। चोरी की घटना के बाद अब वहां केवल 13 तोपें बची हैं। बताया जा रहा है कि चोरी हुई तोप ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पहले भी की थी कोशिश, इस बार वाहन लेकर पहुंचे
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बदमाशों ने इस वारदात की तैयारी पहले ही कर ली थी। 5 जुलाई को कथित तौर पर उन्होंने एक तोप को नीचे गिरा दिया था, लेकिन भारी वजन के कारण उसे ले नहीं जा सके। इसके बाद 16 जुलाई की रात वे लोडिंग वाहन के साथ लौटे और तोप चोरी कर ले गए। घटनास्थल के पास मिले टायरों के निशान भी वाहन के इस्तेमाल की ओर इशारा कर रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी बाल किशन ने बताया कि उनके पास सुरक्षा के लिए केवल एक डंडा था। रोशनी के लिए टॉर्च तक उपलब्ध नहीं थी। हथियारबंद बदमाशों के सामने उनके पास विरोध करने का कोई साधन नहीं था। घटना के बाद किले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अष्टधातु की बनी थी ऐतिहासिक तोप
बताया जा रहा है कि चोरी हुई तोप पीतल, तांबा, कांसा सहित अष्टधातु के मिश्रण से बनी थी। उस पर राजचिह्न और फारसी व देवनागरी लिपि में शिलालेख अंकित थे। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी धरोहरों का ऐतिहासिक महत्व बेहद अधिक होता है।
करोड़ों की कीमत के दावे, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं
कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय अवैध एंटीक बाजार में इस तरह की दुर्लभ ऐतिहासिक तोपों की कीमत करोड़ों रुपये तक हो सकती है। हालांकि, इस कीमत की किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
जांच में जुटी पुलिस और पुरातत्व विभाग
मामले की शिकायत नरवर थाने में दर्ज कर ली गई है। करैरा एसडीओपी प्रशांत शर्मा ने कहा कि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्कर गिरोह की संलिप्तता से भी इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं राज्य पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुमार महोबिया ने किले का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और तोप की जल्द बरामदगी के लिए पुलिस से समन्वय करने की बात कही है।