मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) में एक बार फिर बाघ की मौत का मामला सामने आया है। किशनगढ़ कोर रेंज के दुर्गम जंगल में एक वयस्क नर बाघ मृत मिला। पिछले तीन महीनों में यह तीसरी घटना है, जिससे वन्यजीव संरक्षण और पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
गश्त के दौरान मिला बाघ का शव
शनिवार को पन्ना टाइगर रिजर्व की वन विभाग टीम किशनगढ़ कोर रेंज के बृजपुरा बीट में नियमित गश्त पर थी। इसी दौरान मुख्य मार्ग से करीब तीन से चार किलोमीटर दूर एक पहाड़ी और दुर्गम इलाके में वयस्क नर बाघ का शव दिखाई दिया। शुरुआत में वनकर्मियों को लगा कि बाघ आराम कर रहा है। काफी देर तक कोई हलचल नहीं होने पर टीम ने दूरबीन से निगरानी की और फिर मौके पर पहुंचकर पुष्टि की कि उसकी मौत हो चुकी है।
प्रारंभिक जांच में क्या मिला?
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक वीरेंद्र कुमार पटेल के अनुसार, शुरुआती जांच में बाघ के सभी अंग सुरक्षित पाए गए हैं। शरीर पर किसी भी प्रकार की बाहरी चोट, घाव या दूसरे वन्यजीव से संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। इसके अलावा घटनास्थल के आसपास भी शिकार या मानवीय हस्तक्षेप के कोई स्पष्ट साक्ष्य नहीं मिले हैं। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा मौत के कारण का खुलासा
टाइगर रिजर्व प्रबंधन फिलहाल इसे प्रथम दृष्टया प्राकृतिक मौत मानकर जांच कर रहा है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
तीन महीने में तीन बाघों की मौत से बढ़ी चिंता
पन्ना टाइगर रिजर्व में लगातार तीसरी बार बाघ की मौत ने संरक्षण व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
- कुछ समय पहले गंगऊ क्षेत्र में मुख्य मार्ग के किनारे एक नर बाघ का कई दिन पुराना क्षत-विक्षत कंकाल मिला था।
- इसके बाद तारा गांव से रेस्क्यू किए गए रेडियो कॉलर लगे एक युवा नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
- अब किशनगढ़ कोर रेंज में एक और वयस्क बाघ मृत मिलने से पार्क प्रबंधन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
वन विभाग ने मृत बाघ का पोस्टमार्टम कराकर नमूने जांच के लिए भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाघ की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई या इसके पीछे कोई अन्य वजह है।