जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो की उस अंतरिम याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी गई थी।
सरकार का फैसला मनमाना नहीं: हाई कोर्ट
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्णा की एकल पीठ ने विशेष सुनवाई के दौरान कहा कि लंबे समय से भूख हड़ताल पर रहने के कारण सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति चिंताजनक हो गई थी। ऐसे में सरकार द्वारा उन्हें जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले जाना उचित था और इसे मनमाना कदम नहीं कहा जा सकता।
निजी अस्पताल भेजने से अदालत का इनकार
वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने अदालत से अनुरोध किया था कि उन्हें अपनी पसंद के निजी अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दी जाए। हालांकि अदालत ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और कहा कि इस समय उन्हें सफदरजंग अस्पताल में ही चिकित्सा सुविधा मिलती रहेगी।
कोर्ट ने स्वास्थ्य रिपोर्ट भी मांगी
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और अस्पताल प्रशासन को नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के भीतर सोनम वांगचुक की ताजा स्वास्थ्य रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई भी निर्धारित कर दी गई है।
अस्पताल में इलाज पर क्या बोली अदालत?
अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार सोनम वांगचुक का इलाज डॉक्टरों की निगरानी में हो रहा है और उन्हें केवल उनकी सहमति से चिकित्सा सहायता दी गई है। इसलिए इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी शारीरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन हुआ है।
पत्नी ने लगाए ये आरोप
फैसले के बाद डॉ. गीतांजलि आंगमो ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है और अस्पताल में रखा जाना “अवैध हिरासत” जैसा है। हालांकि यह उनका आरोप है और अदालत ने इस दावे पर कोई अंतरिम राहत नहीं दी।