कहा- गांव में मुनादी पिटवाकर प्रशासन ने अपराधियों जैसा सुलूक किया
मध्य प्रदेश की मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपनी जाति को लेकर चल रहे विवाद पर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। एक प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास करीब 110 वर्ष पुराने दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें उनके पूर्वजों का रिकॉर्ड दर्ज है। उनके अनुसार, इन दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि उनका परिवार बागरी समाज से संबंधित है।
‘जाति साबित करने के लिए मुनादी कराई गई’
प्रतिमा बागरी ने कहा कि प्रशासनिक प्रक्रिया के दौरान गांव में मुनादी तक कराई गई। उनका कहना है कि जिस तरह उनसे बार-बार अपनी पहचान साबित करने के लिए कहा गया, उससे उन्हें मानसिक पीड़ा हुई। उन्होंने इसे बेहद अपमानजनक अनुभव बताया।
‘अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया’
इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस कराया गया जैसे वे कोई अपराधी हों। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में होने के बावजूद उन्हें ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।
दस्तावेजों का किया जिक्र
प्रतिमा बागरी के अनुसार, उनके परिवार के पास ऐसे पुराने राजस्व और वंशावली संबंधी रिकॉर्ड हैं, जो कई पीढ़ियों से सुरक्षित हैं। उनका दावा है कि ये दस्तावेज उनके सामाजिक वर्ग की पुष्टि करते हैं।
विवाद कैसे शुरू हुआ
हाल के दिनों में प्रतिमा बागरी की जाति को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसी के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा जांच प्रक्रिया शुरू की गई। इस पूरे घटनाक्रम के बीच उन्होंने पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया पर भी बोलीं
प्रतिमा बागरी ने कहा कि इस पूरे विवाद को राजनीतिक रंग देने की कोशिश भी की गई। उन्होंने भरोसा जताया कि सभी तथ्य सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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