अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले ने अब केवल कथित धन गड़बड़ी तक खुद को सीमित नहीं रखा है। FIR दर्ज होने में हुई देरी, ट्रस्ट की आंतरिक प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। इस बीच SIT अपनी जांच आगे बढ़ा रही है। चंपत राय ने कहा है कि वे अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद सभी आरोपों पर बिंदुवार जवाब देंगे।
FIR में देरी सबसे बड़ा सवाल क्यों बनी
जांच से जुड़े दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित अनियमितताओं की जानकारी शुरुआती स्तर पर मिलने के बावजूद पुलिस शिकायत बाद में दर्ज हुई। यही समय अंतराल अब जांच का अहम विषय बन गया है। विपक्षी दल भी इसी मुद्दे को लेकर सरकार और ट्रस्ट से जवाब मांग रहे हैं।
SIT किन बिंदुओं की जांच कर रही है
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि:
- कथित गड़बड़ी की जानकारी सबसे पहले किसे मिली?
- तत्काल FIR क्यों नहीं कराई गई?
- दान की गिनती और जमा करने की प्रक्रिया में क्या कमियां थीं?
- निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं?
- क्या मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित था या प्रणालीगत खामियां भी थीं?
चंपत राय का क्या कहना है
पूर्व महासचिव चंपत राय ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे फिलहाल इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं करेंगे। उनका कहना है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वे सभी सवालों का बिंदुवार जवाब देंगे। उन्होंने श्रद्धालुओं से धैर्य रखने की भी अपील की है।
ट्रस्ट में भी हुए बदलाव
चढ़ावा विवाद के बीच ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए गए हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं तथा नए CEO के चयन की प्रक्रिया शुरू की गई है। ट्रस्ट का कहना है कि भविष्य में वित्तीय पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी
मामले की जांच अभी जारी है और SIT को रिपोर्ट सौंपने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया है। ऐसे में FIR में देरी और अन्य मुद्दों पर अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल कई आरोप और सवाल जांच के दायरे में हैं, जिनकी आधिकारिक पुष्टि अंतिम रिपोर्ट के बाद ही होगी।