सतना। डिजिटल डेस्क
सतना जिले में सेवा सहकारी समिति अमकुई के प्रभारी प्रबंधक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ आर्थिक अनियमितताओं के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू), रीवा ने आय से अधिक संपत्ति और खाद वितरण में कथित गड़बड़ी के मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं।
ईओडब्ल्यू की टीम ने शनिवार सुबह करीब 6 बजे जसो थाना क्षेत्र के सिजहटी स्थित आरोपी के घर पर छापा मारा। कार्रवाई के दौरान संपत्ति और आर्थिक लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई। जांच देर शाम करीब 6 बजे तक चली।
17.51 लाख रुपये आय, 92.16 लाख की संपत्ति का खुलासा
ईओडब्ल्यू के मुताबिक सुरेंद्र प्रताप सिंह बघेल की वर्ष 2006 में विक्रेता के पद पर नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2020 में उन्हें प्रभारी प्रबंधक की जिम्मेदारी मिली।
प्रारंभिक जांच में जनवरी 2007 से सितंबर 2025 तक उनकी कुल वैध आय लगभग 17.51 लाख रुपये आंकी गई। वहीं, जांच के दौरान 57.68 लाख रुपये का व्यय सामने आया। इसके अलावा 22.50 लाख रुपये के भूमि संबंधी दस्तावेज और 11.97 लाख रुपये के स्वर्ण आभूषणों का सत्यापन किया गया।
जांच में नागौद क्षेत्र में करीब 2,200 वर्गफीट भूमि पर बने मकान, कार, ट्रैक्टर और दो मोटरसाइकिलों सहित अन्य संपत्तियों का भी पता चला। आरोपी के बेटे की दिल्ली में पढ़ाई पर हुए खर्च की जानकारी भी जांच में शामिल की गई है।
ईओडब्ल्यू के अनुसार प्रारंभिक जांच में कुल संपत्ति करीब 92.16 लाख रुपये की पाई गई। इसके साथ ही छह बैंक खातों और छह बीमा पॉलिसियों की जांच भी की जा रही है।
आय से 426 प्रतिशत से अधिक संपत्ति का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी की ज्ञात वैध आय की तुलना में संपत्ति और खर्च का अंतर सामने आया है। इसी आधार पर आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है।
हालांकि, संपत्ति के मूल्यांकन, आय के सभी स्रोतों और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद ही मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल सामने आए आंकड़े प्रारंभिक जांच से संबंधित हैं।
खाद वितरण में 122 फर्जी किसानों के नाम दर्ज करने का आरोप
ईओडब्ल्यू ने खाद वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर भी आरोपी के खिलाफ अलग एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि सेवा सहकारी समिति अमकुई में पदस्थापना के दौरान पीओएस मशीन में किसानों के विवरण दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई।
जांच के अनुसार, मशीन में 194 किसानों का विवरण दर्ज किया गया था, जबकि 122 फर्जी किसानों के नामों की प्रविष्टियां कर खाद की कथित कालाबाजारी की गई।
आरोप यह भी है कि वास्तविक किसानों के परमिट और रसीदों की कार्बन प्रतियों में काट-छांट कर यूरिया और डीएपी की 10 से 20 अतिरिक्त बोरियां दर्ज की गईं। इसके जरिए ऋण समायोजन कराया गया और फर्जी स्टॉक रजिस्टर तैयार किया गया।
दोनों मामलों की जांच जारी
ईओडब्ल्यू रीवा ने आय से अधिक संपत्ति और खाद वितरण में कथित अनियमितताओं को अलग-अलग मामलों के रूप में दर्ज किया है। बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों, संपत्ति के दस्तावेजों और खाद वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
फिलहाल ये आरोप जांच के अधीन हैं। आरोपी के खिलाफ दर्ज मामलों में अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।