सतना। डिजिटल डेस्क
जिला अस्पताल में प्रसव के दौरान 20 वर्षीय प्रसूता और उसके नवजात बच्चे की मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि प्रसूता को इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। मामले में मौत की वजह स्पष्ट करने के लिए तीन डॉक्टरों के पैनल से प्रसूता का पोस्टमार्टम कराया गया है। बिसरा (मल्टी ऑर्गन) प्रिजर्व कराया गया है, जिसे जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा।
डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया मौत की वजह पल्मोनरी एम्बोलिज्म होने की आशंका जताई है। इसमें प्रसव के दौरान अचानक शरीर में बने रक्त के थक्के फेफड़ों तक पहुंचने से गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम और आगे होने वाली जांच की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मैहर से जिला अस्पताल रेफर हुई थी प्रसूता
जानकारी के मुताबिक दीपांजलि साकेत पति शिवा साकेत, उम्र 20 वर्ष, निवासी भदनपुर, जिला मैहर को प्रसव पीड़ा होने पर 16 सितंबर को परिजन सिविल अस्पताल मैहर लेकर पहुंचे थे।
16-17 सितंबर की रात करीब 10 बजे गर्भस्थ शिशु की धड़कन कम होने और बच्चे के नीचे नहीं आने की समस्या बताकर दीपांजलि को जिला अस्पताल सतना रेफर किया गया। परिजन रात करीब 12 बजे उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां मेडिकल कॉलेज की ड्यूटी डॉक्टर कीर्ति सिंह और डॉ. अंजली गुप्ता ने मरीज को अटेंड कर इलाज शुरू किया।
परिजनों के मुताबिक 18 सितंबर को दिनभर उसकी स्थिति सामान्य थी।
रात में बिगड़ी तबीयत, एचडीयू में किया शिफ्ट
18-19 सितंबर की रात दीपांजलि की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद उसे अस्पताल के हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में शिफ्ट किया गया, जहां मेडिकल कॉलेज की एसआर डॉ. श्वाति ने इलाज शुरू किया।
रात करीब 11.20 बजे दीपांजलि ने मृत बच्चे को जन्म दिया। गायनिक विभाग की एचओडी डॉ. मंजू सिंह के मुताबिक मृत बच्चा पैदा होने के बाद प्रसूता का बीपी अचानक कम होने लगा। उसका ऑक्सीजन स्तर भी गिरा और उसे उल्टी हुई। इसके करीब 10 मिनट बाद उसकी मौत हो गई।
प्रसव से पहले चाय-ब्रेड खिलाने की बात
अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि प्रसव से करीब आधे घंटे पहले परिजनों ने मना करने के बावजूद दीपांजलि को चाय के साथ ब्रेड खिला दिया था।
वहीं परिजनों ने रात में विशेषज्ञ डॉक्टर की ड्यूटी को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि विशेषज्ञ के तौर पर डॉ. निशात फातिमा की ड्यूटी थी, लेकिन वह अस्पताल में मौजूद नहीं थीं।
अस्पताल ने कहा- कॉल पर डॉक्टर एचडीयू पहुंचे
मेडिकल कॉलेज के पीआरओ डॉ. धीरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि 18 सितंबर को दोपहर और शाम के राउंड के दौरान मरीज बेड पर नहीं मिली थी। उनके अनुसार रात में कॉल किए जाने पर डॉ. निशात फातिमा और मेडिसिन विभाग के डॉक्टर एचडीयू पहुंचे थे।
उन्होंने बताया कि मरीज की हालत गंभीर होने पर सीपीआर देकर जान बचाने की कोशिश की गई। अस्पताल की ओर से यह भी कहा गया कि मौत से पहले परिजनों को मरीज की स्थिति के बारे में जानकारी दी गई थी।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक सीजर की सहमति को लेकर भी परिजनों से बात हुई थी, लेकिन परिजनों ने सीजर की सहमति नहीं दी थी।
मौत की वजह जानने पोस्टमार्टम, बिसरा सुरक्षित
मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए प्रसूता का तीन डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराया गया है। बिसरा और मल्टी ऑर्गन प्रिजर्व किए गए हैं। इन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा।
सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने मैटरनल डेथ की समीक्षा के लिए टीम गठित कर जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट होगी। जांच में यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर ने क्या कहा
डॉ. मंजू सिंह, एचओडी गायनिक विभाग:
लेबर रूम में दीपांजलि की तबीयत बिगड़ने लगी तो उसे तुरंत एचडीयू में शिफ्ट कर इलाज शुरू किया गया। सामान्य प्रसव से मृत बच्चा पैदा हुआ। प्रसव के बाद अचानक तबीयत ज्यादा खराब हुई और करीब 10 मिनट में मौत हो गई।
डॉ. अमर सिंह, सिविल सर्जन:
प्रसूता की मौत की वजह स्पष्ट करने के लिए डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। टीम बनाकर मैटरनल डेथ की समीक्षा भी कराई जाएगी।