सतना। “तुमसे नहीं होगा…” यह बात कुलदीप सिंह ने कई बार सुनी थी। लेकिन उन्होंने बहस करने के बजाय अपनी मेहनत से जवाब देने का फैसला किया। सतना से केदारनाथ तक की करीब 1200 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं थी, बल्कि खुद को साबित करने का ऐसा सफर बन गई, जिसने उनके आत्मविश्वास को नई पहचान दी।
छह हजार रुपये और पुरानी साइकिल के भरोसे निकले सफर पर
31 मई 2026 को कुलदीप सिंह ने बिना किसी स्पॉन्सर, टीम या विशेष तैयारी के यात्रा शुरू की। उनके पास आठ साल पुरानी साइकिल, कुछ जरूरी कपड़े, चादर, चटाई, पंक्चर रिपेयर किट, दवाइयां और जेब में केवल छह हजार रुपये थे। इसी सीमित संसाधन के साथ उन्होंने केदारनाथ पहुंचने का संकल्प लिया।
मैदानी रास्तों से लेकर पहाड़ों की कठिन चढ़ाई तक
सतना से निकलने के बाद उनका सफर चित्रकूट, बांदा, इटावा, आगरा, मथुरा, मेरठ, हरिद्वार, ऋषिकेश, रुद्रप्रयाग, गुप्तकाशी, सोनप्रयाग और गौरीकुंड से होकर गुजरा। मैदानी इलाकों की गर्मी और पहाड़ों की कठिन चढ़ाई ने कई बार उनकी परीक्षा ली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 17 जून को कुलदीप बाबा केदारनाथ के धाम पहुंचे। दर्शन करने के बाद 19 जून को वापसी शुरू की और 29 जून को सतना लौट आए।
पूरी यात्रा के बाद भी बच गए पैसे
इस यात्रा की खास बात यह भी रही कि कुलदीप ने हर खर्च सोच-समझकर किया। करीब एक महीने की यात्रा पूरी करने के बाद भी उनके पास लगभग एक हजार रुपये बच गए। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों में भी बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है, यदि योजना और धैर्य दोनों साथ हों।
डांस टीचर से बन गए प्रेरणा की मिसाल
कुलदीप सिंह तीन भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटे हैं। 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने कोरियोग्राफर और डांस टीचर के रूप में अपना करियर बनाया। वे बताते हैं कि कई बार लोगों ने उन्हें कम आंका, लेकिन वही बातें उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बन गईं।
अब जगन्नाथ पुरी तक साइकिल से जाने की तैयारी
केदारनाथ यात्रा पूरी होने के बाद कुलदीप अब अगली चुनौती की तैयारी कर रहे हैं। उनका अगला लक्ष्य साइकिल से जगन्नाथ पुरी पहुंचना है। उनका कहना है कि हर नई यात्रा उन्हें पहले से ज्यादा मजबूत बनाती है और दूसरों को भी अपने सपनों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती है कुलदीप कहते हैं कि किसी भी मंजिल तक पहुंचने से पहले सबसे कठिन लड़ाई अपने मन से होती है। यदि इंसान अपने डर और संदेह पर जीत हासिल कर ले, तो रास्ते की मुश्किलें भी छोटी लगने लगती हैं।