सतना। डिजिटल डेस्क
कोलगवां थाना क्षेत्र में नगर वन के पास छात्रा से मारपीट और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। सोमवार को चारों आरोपी छात्राओं और छात्र श्रवण सेन को थाने बुलाकर पुलिस व साइबर सेल ने पूछताछ की। इसके बाद सभी के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं।
चार आरोपी छात्राओं और छात्र से पूछताछ
पुलिस के अनुसार, चारों आरोपी छात्राओं के साथ छात्र श्रवण सेन को भी सोमवार को कोलगवां थाने बुलाया गया था। यहां पुलिस के साथ साइबर सेल की टीम ने उनसे घटना से जुड़े वीडियो, मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री को लेकर पूछताछ की।
पूछताछ के बाद सभी के बयान कलमबंद किए गए। पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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मोबाइल में डिलीट डेटा की होगी रिकवरी
पुलिस ने मामले की जांच के लिए चारों आरोपी छात्राओं और श्रवण सेन के मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इन मोबाइल में घटना से संबंधित वीडियो, चैट, कॉल या अन्य डिजिटल सामग्री होने की संभावना को देखते हुए उनकी तकनीकी जांच कराई जाएगी।
पुलिस के मुताबिक, मोबाइल में डिलीट किए गए डेटा की रिकवरी के लिए इन्हें फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा। रिकवर होने वाले डेटा से घटना के दौरान हुई गतिविधियों और वीडियो के प्रसार से जुड़े तथ्यों की जांच में मदद मिल सकती है।
श्रवण सेन पर अभी अलग से कार्रवाई नहीं
एफआईआर में नाम सामने आने के बावजूद छात्र श्रवण सेन के खिलाफ अभी अलग से कायमी नहीं किए जाने को लेकर पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
पुलिस को दिए गए आरोपों के मुताबिक, 5 सितंबर की दोपहर झाली निवासी छात्र श्रवण सेन के साथ रिलेशन में नहीं रहने की बात को लेकर चार छात्राएं पीड़ित छात्रा को नगर वन के पास एक सुनसान स्थान पर ले गई थीं। आरोप है कि वहां छात्रा के साथ मारपीट की गई।
पीड़िता के आरोप के अनुसार, मारपीट तब तक जारी रही, जब तक उसने वीडियो कॉल पर श्रवण सेन से माफी नहीं मांग ली। घटना का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
मामले में कोलगवां थाना पुलिस ने चार आरोपी छात्राओं के खिलाफ BNS की धारा 296(बी), 115(2), 351(3) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया है।
अब पुलिस की जांच का फोकस मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों पर है। फोरेंसिक जांच से डिलीट डेटा और घटना से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों के सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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