स्क्रैप आर्ट से उपजे महादेव, अष्टधातु की अनूठी प्रतिमा

सिवनी। डिजिटल डेस्क

कबाड़ और धातुओं के बेकार समझे जाने वाले टुकड़ों से जब कला आकार लेती है, तो वह सिर्फ कलाकृति नहीं रहती, बल्कि अपनी अलग पहचान बना लेती है। सिवनी में कलाकार विक्की कश्यप ने भगवान शिव की ऐसी ही अनूठी प्रतिमा तैयार की है।

तीन महीने की मेहनत से तैयार हुई प्रतिमा

कलाकार विक्की कश्यप ने लगातार पांचवें वर्ष भगवान शिव की प्रतिमा तैयार की है। इस बार प्रतिमा को पारंपरिक धातुओं के साथ स्क्रैप आर्ट के संयोजन से नया रूप दिया गया है।

करीब तीन महीने तक चले निर्माण कार्य के बाद तैयार हुई प्रतिमा का वजन लगभग 5 क्विंटल बताया गया है। प्रतिमा को तैयार करने में कलाकार के साथ उनकी टीम के 12 से 15 सदस्यों ने योगदान दिया।

टीम के सदस्य अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालते रहे। कुछ लोग कलाकृति तैयार करने में जुटे रहे, जबकि कुछ ने सामग्री जुटाने और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाली। टीम के कुछ सदस्यों ने पूरी प्रक्रिया की वीडियो शूटिंग का काम भी किया।

आठ धातुओं से तैयार किया गया स्वरूप

इस प्रतिमा की खासियत इसमें इस्तेमाल की गई धातुएं हैं। कलाकार ने इसमें सोना, चांदी, तांबा, पीतल, लोहा, स्टील, जस्ता और रांगा सहित आठ धातुओं का इस्तेमाल किया है।

इन्हीं अलग-अलग धातुओं को कलात्मक तरीके से जोड़कर भगवान शिव का स्वरूप तैयार किया गया है। स्क्रैप के टुकड़ों का इस्तेमाल प्रतिमा को अलग पहचान देता है और इसे सामान्य मूर्तियों से अलग बनाता है।

माथे पर सोना-चांदी, जटाओं में तांबे का इस्तेमाल

प्रतिमा में भगवान शिव के माथे पर सोने और चांदी से तिलक का स्वरूप तैयार किया गया है। वहीं जटाओं में तांबे का इस्तेमाल किया गया है।

प्रतिमा में हाथी से जुड़े हिस्से में जस्ता और रांगा का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा पीतल के लोटे और स्नान पात्र को भी कलाकृति का हिस्सा बनाया गया है।

लोहा और स्टील के टुकड़ों को बिल्डिंग के जरिए जोड़कर प्रतिमा का ढांचा तैयार किया गया। कई हिस्सों को स्क्रू, नट-बोल्ट और अन्य धातु सामग्री की मदद से जोड़ा गया है।

स्क्रैप सामग्री से दिया अनूठा रूप

प्रतिमा तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए गए कुछ लोहे और स्टील के टुकड़े स्थानीय दुकानदारों की ओर से सहयोग के रूप में उपलब्ध कराए गए। इन बेकार समझे जाने वाले टुकड़ों को कलाकार ने रचनात्मक तरीके से प्रतिमा में शामिल किया।

इस तरह कलाकृति में कला के साथ पुन: उपयोग यानी recycling का संदेश भी दिखाई देता है। स्क्रैप सामग्री को धार्मिक और कलात्मक स्वरूप देना इस प्रतिमा की खास विशेषता है।

12 से 15 सदस्यों की टीम ने दिया साथ

इस कलाकृति को तैयार करने में कलाकार विक्की कश्यप के साथ उनकी टीम के करीब 12 से 15 सदस्यों ने योगदान दिया।

टीम में रोहित रघुवंशी, लक्की डेहरिया, राहुल रघुवंशी, आयुष यादव, यश बघेल, अनिकेत कश्यप, शिव कश्यप, कपिल कश्यप, रौनक ठाकुर, आर्यन शुक्ला और श्लोक पटवा सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

किसी ने प्रतिमा निर्माण में सहयोग दिया तो किसी ने सामग्री जुटाने, व्यवस्थाओं और वीडियो शूटिंग की जिम्मेदारी संभाली।

कला और सनातनी परंपरा का संगम

सिवनी की यह कलाकृति पारंपरिक धार्मिक आस्था को आधुनिक स्क्रैप आर्ट से जोड़ने का प्रयास है। अलग-अलग धातुओं के इस्तेमाल और उन्हें एक ही प्रतिमा में कलात्मक ढंग से पिरोने से भगवान शिव का यह स्वरूप खास बन गया है।

लगातार पांचवें वर्ष भगवान शिव की प्रतिमा तैयार करने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार कलाकार ने स्क्रैप और अष्टधातु के संयोजन के जरिए नया प्रयोग किया है।

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