नईदिल्ली। मतदाता सूची (Electoral Roll) से नाम हटने और भारतीय नागरिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हट जाने का मतलब यह नहीं है कि उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग (ECI) मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार रखता है, लेकिन नागरिकता तय करना उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि:
- चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का संवैधानिक अधिकार है।
- यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो तो उसका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।
- लेकिन केवल मतदाता सूची से नाम हट जाने से कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं रह जाता।
- भारतीय नागरिकता का निर्धारण चुनाव आयोग नहीं, बल्कि कानून के तहत सक्षम प्राधिकरण और न्यायिक प्रक्रिया करती है।
मामला क्या है
याचिका में आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल में विशेष पुनरीक्षण के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए, उन्हें राशन, सामाजिक कल्याण योजनाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं से भी वंचित किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने कहा कि लाखों अपीलें लंबित हैं और अंतिम निर्णय होने से पहले लोगों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर अदालत की टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का दायित्व केवल मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना है। आयोग यह तय नहीं कर सकता कि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक है या नहीं। नागरिकता से जुड़े विवादों का समाधान संबंधित कानूनों और सक्षम प्राधिकारियों के माध्यम से ही होगा।
सरकारी योजनाओं पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह भी मुद्दा आया कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण कई लोगों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पहलू पर भी जवाब मांगा है और मामले की आगे सुनवाई जारी रहेगी।
इस फैसले का क्या मतलब है
यह टिप्पणी उन लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिनके नाम किसी कारणवश मतदाता सूची से हट जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि:
- मतदाता सूची से नाम हटना = नागरिकता समाप्त होना नहीं।
- चुनाव आयोग नागरिकता का अंतिम निर्णय नहीं कर सकता।
- नागरिकता का प्रश्न अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत तय होगा।