जंतर-मंतर पर करीब 20 दिनों की भूख हड़ताल के बाद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाने के तरीके पर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो (Gitanjali J. Angmo) ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि वांगचुक कोई अपराधी नहीं हैं, फिर उन्हें चादरों के पीछे छिपाकर क्यों ले जाया गया। साथ ही उन्होंने पूरे देश में लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के लिए हर राज्य और जिले में ‘जंतर-मंतर’ जैसी जगह बनाने की मांग भी की।
क्या कहा गीतांजलि ने
गीतांजलि आंगमो ने कहा, “वह कोई अपराधी नहीं हैं। फिर उन्हें चादरों के पीछे छिपाकर क्यों ले जाया गया? अगर उनकी सेहत की चिंता थी, तो उन्हें सम्मान के साथ अस्पताल ले जाना चाहिए था।” उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक अस्पताल नहीं जाना चाहते थे। उनकी इच्छा संसद मार्च में शामिल होने की थी, लेकिन पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर चली गई।
‘हर राज्य और जिले में बने जंतर-मंतर’
अपने बयान में गीतांजलि ने लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों के लिए स्थायी व्यवस्था की भी मांग की। उन्होंने कहा कि देश के हर राज्य और हर जिले में जंतर-मंतर जैसी जगह होनी चाहिए, ताकि लोग शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा सकें।
20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे वांगचुक
सोनम वांगचुक पिछले लगभग 20 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे। उनका आंदोलन लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्रीय अधिकारों से जुड़ी मांगों को लेकर चल रहा है। स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका के बीच दिल्ली पुलिस उन्हें अस्पताल लेकर गई थी।
सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस
गीतांजलि आंगमो का यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कई लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि लंबी भूख हड़ताल के कारण स्वास्थ्य को देखते हुए अस्पताल ले जाना जरूरी था। फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इस बयान पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।