जुलाई का महीना आमतौर पर विंध्य में झमाझम बारिश का होता है, लेकिन इस बार सतना, रीवा, सीधी, मऊगंज, सिंगरौली और आसपास के जिलों में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है। खेतों में नमी घटने लगी है और किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं। सवाल यह है कि आखिर मानसून विंध्य से क्यों रूठ गया? मौसम विज्ञानियों के अनुसार इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई मौसमीय कारण हैं।
जुलाई में क्यों थम गई बारिश
जुलाई के पहले सप्ताह में मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हुई थी। उस समय प्रदेश के ऊपर सक्रिय कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) और अन्य मौसमीय तंत्र मौजूद थे, जिससे लगातार वर्षा हुई। लेकिन इन प्रणालियों के कमजोर पड़ने के बाद पूरे मध्य भारत में बारिश की गतिविधियां अचानक घट गईं। IMD ने भी 9 जुलाई के बाद मध्य भारत में वर्षा की गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना जताई थी।
कारण 1: मानसून ट्रफ का प्रभाव कम हुआ
मानसून ट्रफ वह मुख्य रेखा होती है जिसके आसपास बादल और वर्षा की गतिविधियां सबसे अधिक होती हैं। जब यह ट्रफ मध्य प्रदेश और विंध्य क्षेत्र के अनुकूल स्थिति में रहती है तो अच्छी बारिश होती है। फिलहाल इसका प्रभाव कमजोर पड़ने से व्यापक वर्षा नहीं हो पा रही है।
कारण 2: बंगाल की खाड़ी में नया लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बना
मध्य प्रदेश, खासकर विंध्य क्षेत्र में अच्छी बारिश के लिए बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये सिस्टम मध्य भारत की ओर बढ़ते हैं और व्यापक वर्षा कराते हैं। फिलहाल ऐसा कोई मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं है, इसलिए बारिश का सिलसिला कमजोर है।
कारण 3: मानसून ‘ब्रेक फेज’ में पहुंच गया
मौसम विज्ञान में इसे “ब्रेक मानसून” कहा जाता है। इस दौरान कुछ दिनों तक बारिश सामान्य से काफी कम हो जाती है। इसका अर्थ यह नहीं कि मानसून खत्म हो गया है, बल्कि यह मानसून का एक स्वाभाविक चरण है। इसी वजह से विंध्य सहित मध्य भारत के कई हिस्सों में वर्षा की रफ्तार थम गई है।
कारण 4: बादल बन रहे, लेकिन पर्याप्त नमी नहीं
विंध्य क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर बादल तो बन रहे हैं, लेकिन वातावरण में पर्याप्त नमी और मजबूत मौसमीय समर्थन नहीं मिलने से वे व्यापक बारिश नहीं करा पा रहे। इसी कारण कहीं हल्की फुहार तो कहीं पूरा दिन सूखा मौसम देखने को मिल रहा है।
कारण 5: पूरे प्रदेश में बारिश का असंतुलन
यह स्थिति केवल विंध्य तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। कई स्थानों पर लोग पारंपरिक तरीके से अच्छी बारिश की कामना भी कर रहे हैं। वहीं IMD का कहना है कि रविवार से बारिश की गतिविधियां फिर बढ़ सकती हैं।
किसानों की क्यों बढ़ी चिंता
विंध्य में खरीफ सीजन के दौरान धान, सोयाबीन, मक्का और अरहर की फसलें बारिश पर काफी निर्भर रहती हैं। लंबे अंतराल तक बारिश नहीं होने से खेतों की नमी कम होती है और फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। यदि यह स्थिति अधिक दिनों तक बनी रहती है तो दोबारा सिंचाई की जरूरत भी पड़ सकती है।
क्या फिर लौटेगा मानसून
मौसम विभाग के अनुसार यह स्थायी स्थिति नहीं है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनेगा और मानसून प्रणाली फिर सक्रिय होगी, मध्य प्रदेश और विंध्य क्षेत्र में बारिश का दौर दोबारा शुरू होने की संभावना है। फिलहाल कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा और गरज-चमक की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।