अहमदाबाद। साइबर अपराधियों द्वारा ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को ठगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामले में एक व्यक्ति को अनजान नंबर से कॉल कर खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताने वाले ठगों ने 28 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और उससे 1.47 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित को एक कॉल आया जिसमें बताया गया कि उसके आधार कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हुआ है। कॉल करने वालों ने खुद को पुलिस, सीबीआई और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराया। इसके बाद वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और कथित पूछताछ के जरिए उसे लगातार निगरानी में रखा गया।
ठगों ने पीड़ित को यह विश्वास दिलाया कि वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ में है और जांच पूरी होने तक किसी से संपर्क नहीं कर सकता। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उससे कई किस्तों में अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
करीब 28 दिनों तक चले इस साइबर जाल के बाद जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ तो उसने पुलिस और साइबर क्राइम अधिकारियों से संपर्क किया। जांच एजेंसियां अब आरोपियों की पहचान और रकम की रिकवरी के प्रयास में जुटी हैं।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में किसी भी कानून प्रवर्तन एजेंसी के पास ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है। यदि कोई व्यक्ति फोन या वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है या बैंक खाते की जानकारी साझा करने के लिए दबाव बनाता है तो उसे तुरंत संदिग्ध मानना चाहिए।
विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि ऐसे मामलों में घबराने के बजाय कॉल काटें, संबंधित एजेंसी के आधिकारिक नंबर पर संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करें और तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।