10 मुहर्रम का इतिहास: इमाम हुसैन ने क्यों दी शहादत? पढ़िए कर्बला की पूरी दास्तां

नई दिल्ली। इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम बेहद पवित्र माना जाता है। इसकी 10वीं तारीख, जिसे आशूरा कहा जाता है, विशेष रूप से इमाम हुसैन इब्न अली की शहादत की याद में मनाई जाती है। वर्ष 680 ईस्वी में आज के इराक स्थित कर्बला के मैदान में हुई यह घटना इस्लामी इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिनी जाती है।

आखिर कर्बला में क्या हुआ था

हजरत इमाम हुसैन, पैगंबर मुहम्मद के नवासे थे। उस समय उमय्यद शासक यज़ीद ने उनसे अपनी सत्ता के समर्थन में बैअत (निष्ठा की शपथ) लेने को कहा। इमाम हुसैन ने इसे अन्यायपूर्ण मानते हुए स्वीकार नहीं किया और अपने परिवार व साथियों के साथ मदीना से कूफ़ा की ओर रवाना हुए। रास्ते में कर्बला के मैदान में उन्हें और उनके साथियों को रोक लिया गया। कई दिनों तक पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई। इसके बाद 10 मुहर्रम (आशूरा) के दिन युद्ध हुआ, जिसमें इमाम हुसैन और उनके अधिकांश साथी शहीद हो गए।

क्यों खास है आशूरा

शिया मुस्लिम समुदाय के लिए आशूरा इमाम हुसैन की शहादत, न्याय, सत्य और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है। इस दिन मजलिस, जुलूस और शोक सभाओं का आयोजन किया जाता है। वहीं सुन्नी मुस्लिम समुदाय भी आशूरा को महत्वपूर्ण मानता है। इस दिन रोज़ा रखने की परंपरा है। इस्लामी मान्यता के अनुसार इसी दिन अल्लाह ने हजरत मूसा और उनकी कौम को फिरऔन के अत्याचार से निजात दिलाई थी।

इमाम हुसैन की शहादत का संदेश

कर्बला की घटना केवल एक युद्ध नहीं मानी जाती, बल्कि इसे अन्याय के सामने झुकने से इनकार और सत्य के लिए सर्वोच्च बलिदान की मिसाल के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि दुनिया भर में करोड़ों लोग मुहर्रम के दौरान इमाम हुसैन की कुर्बानी को याद करते हैं।

मुहर्रम 2026 में कब था आशूरा

चंद्र दर्शन के आधार पर अलग-अलग देशों में तिथि में थोड़ा अंतर हो सकता है। भारत सहित कई स्थानों पर आशूरा 25 या 26 जून 2026 को मनाया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *