कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: साइकिल मैकेनिक की बेटी अस्मिता डे ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया जूडो का पहला स्वर्ण

त्रिपुरा के एक छोटे से गांव से निकली बेटी ने ग्लासगो में इतिहास लिख दिया। कभी 300 रोज कमाने वाले साइकिल मैकेनिक की बेटी रही अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को जूडो का पहला स्वर्ण पदक दिलाकर करोड़ों भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। अस्मिता डे की कहानी केवल एक स्वर्ण पदक की नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मविश्वास और पिता के सपनों को साकार करने की कहानी है। त्रिपुरा के एक साधारण परिवार से निकलकर कॉमनवेल्थ गेम्स में इतिहास रचने तक का उनका सफर देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

ग्लासगो में रचा भारतीय जूडो का स्वर्णिम इतिहास

स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला 48 किलोग्राम जूडो वर्ग के फाइनल में भारत की 23 वर्षीय अस्मिता डे ने कनाडा की Heidi Quach को रोमांचक मुकाबले में हराया। मुकाबले का फैसला Golden Score में हुआ, जहां अस्मिता ने दूसरा Yuko हासिल कर जीत अपने नाम की।

इस जीत के साथ अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के लिए जूडो का पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं।

पिता के संघर्ष ने बेटी को बनाया चैंपियन

अस्मिता डे त्रिपुरा के दक्षिण त्रिपुरा जिले के बेलोनिया क्षेत्र की रहने वाली हैं। उनके पिता एक साइकिल मैकेनिक थे और रोजाना करीब ₹300 की कमाई से परिवार चलाते थे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी बेटी के खेल के सपनों को टूटने नहीं दिया।

करीब सात महीने पहले ब्रेन स्ट्रोक के कारण उनके पिता का निधन हो गया। इस सदमे ने अस्मिता को झकझोर दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। पिता की याद को अपनी ताकत बनाकर उन्होंने खेल में वापसी की और अब देश के लिए ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीत लिया।

गोल्ड जीतकर हुईं भावुक

स्वर्ण पदक जीतने के बाद अस्मिता की आंखें भर आईं। उन्होंने यह ऐतिहासिक जीत अपने दिवंगत पिता, अपने कोच और उन सभी लोगों को समर्पित की जिन्होंने मुश्किल दौर में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि एक समय उन्हें लगा था कि सब कुछ खत्म हो गया है, लेकिन उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा।

एथलेटिक्स से जूडो तक का सफर

बहुत कम लोग जानते हैं कि अस्मिता ने खेल करियर की शुरुआत 800 मीटर दौड़ से की थी। बाद में जिला स्तरीय चयन के दौरान उनकी प्रतिभा जूडो में पहचानी गई। इसके बाद उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के प्रशिक्षण कार्यक्रम में जगह मिली। वर्तमान में वह भोपाल स्थित SAI रीजनल सेंटर में कोच यशपाल सोलंकी के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं और TOPS (Target Olympic Podium Scheme) का भी हिस्सा हैं।

पहले भी जीत चुकी हैं कई अंतरराष्ट्रीय पदक

अस्मिता डे इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उनके प्रमुख प्रदर्शन इस प्रकार हैं:

  • 2023 जूनियर एशिया कप – स्वर्ण पदक
  • 2023 एशियन ओपन – रजत पदक
  • 2025 कासाब्लांका अफ्रीकन ओपन – स्वर्ण पदक
  • कई बार खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में स्वर्ण पदक
  • 2023-24 जूनियर राष्ट्रीय चैंपियन

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

अस्मिता डे और पुरुष वर्ग में हर्ष सिंह के ऐतिहासिक स्वर्ण पदकों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जूडो दल को बधाई देते हुए इसे भारतीय खेलों के लिए ऐतिहासिक दिन बताया।

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