रप्चर्ड एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से जूझ रही महिला को मिला नया जीवन, 3 लीटर खून बहने के बाद भी डॉक्टरों ने बचाई जान

हर पल जिंदगी और मौत के बीच जंग चल रही थी। पेट में तीन लीटर तक खून जमा हो चुका था और मरीज शॉक की हालत में थी। ऐसे मुश्किल समय में जिला अस्पताल के डॉक्टरों की त्वरित सूझबूझ, टीमवर्क और समय पर किए गए ऑपरेशन ने 22 वर्षीय महिला को नया जीवन दे दिया। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में चिकित्सकों की तत्परता और बेहतर समन्वय का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। यहां 22 वर्षीय उर्मिला धुर्वे को गंभीर हालत में भर्ती कराया गया, जहां जांच में रप्चर्ड ट्यूबल एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए इमरजेंसी ऑपरेशन कर महिला की जान बचा ली।

शॉक की हालत में अस्पताल पहुंची थी मरीज

अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, 9 जुलाई की सुबह करीब 5:35 बजे उर्मिला धुर्वे को तेज पेट दर्द और माहवारी रुकने की शिकायत के साथ गायनिक वार्ड में लाया गया। जांच के दौरान वह शॉक की स्थिति में थी। प्रेग्नेंसी टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद तत्काल सोनोग्राफी कराई गई, जिसमें रप्चर्ड ट्यूबल एक्टोपिक प्रेग्नेंसी की पुष्टि हुई। इसके बाद मरीज को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाकर सर्जरी की गई।

ऑपरेशन में पेट से निकाला गया 3 लीटर रक्त

चिकित्सकों ने बताया कि रप्चर्ड ट्यूबल एक्टोपिक प्रेग्नेंसी बेहद गंभीर मेडिकल इमरजेंसी होती है। इसमें फैलोपियन ट्यूब फटने से शरीर के भीतर तेजी से रक्तस्राव होने लगता है। ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट से करीब तीन लीटर रक्त निकाला गया। साथ ही दो यूनिट ब्लड और दो यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (FFP) चढ़ाया गया, जिससे मरीज की स्थिति में सुधार आया।

दो दिन ICU में रही निगरानी

सफल ऑपरेशन के बाद महिला को दो दिनों तक आईसीयू में भर्ती रखकर लगातार निगरानी की गई। इलाज के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपी महाजन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. निकिता श्रीवास्तव, नर्सिंग स्टाफ रितु और शांति साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। समय पर इलाज और चिकित्सकों की त्वरित कार्रवाई से महिला की जान बचाई जा सकी।

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