हरियाली अमावस्या पर चित्रकूट में उमड़ा आस्था का सैलाब

श्रावण मास की हरियाली अमावस्या पर चित्रकूट एक बार फिर आस्था के रंग में डूब गया। देर रात से ही मंदाकिनी के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी और सुबह होते-होते धार्मिक नगरी में हर तरफ भक्तों की कतारें नजर आने लगीं।

आधी रात के बाद से शुरू हुआ श्रद्धालुओं का पहुंचना

चित्रकूट में हरियाली अमावस्या का पर्व बुधवार को आस्था और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। देर रात 12 बजे के बाद से ही श्रद्धालुओं के चित्रकूट पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

सुबह होते-होते मंदाकिनी नदी के घाट श्रद्धालुओं से भर गए। बड़ी संख्या में भक्तों ने मंदाकिनी में स्नान किया और इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।

हरियाली अमावस्या सावन के महीने में आने वाली अमावस्या है और इसका धार्मिक महत्व काफी अधिक माना जाता है। इस दिन नदी में स्नान, दान-पुण्य और शिव पूजन की परंपरा है।

मंदाकिनी में स्नान के बाद कामदगिरि की परिक्रमा

श्रद्धालु मंदाकिनी में स्नान के बाद कामदगिरि की परिक्रमा के लिए निकल रहे हैं। हाथों में पूजा सामग्री और शिवलिंग के लिए जल लेकर भक्त धार्मिक मार्गों पर नजर आ रहे हैं।

मान्यता के अनुसार कामदगिरि की परिक्रमा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि अमावस्या के पर्व पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचते हैं।

चित्रकूट में प्रत्येक अमावस्या पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की परंपरा है। धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां लाखों लोगों के जुटने का उल्लेख सरकारी विकास योजना के दस्तावेजों में भी मिलता है।

भगवान मत्यगजेंद्रनाथ के दरबार में भी पहुंच रहे भक्त

मंदाकिनी स्नान के बाद श्रद्धालु भगवान मत्यगजेंद्रनाथ शिव के मंदिर पहुंचकर जलाभिषेक कर रहे हैं। भक्तों की ओर से भगवान शिव से परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की जा रही है।

सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व होने के कारण हरियाली अमावस्या का यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए और भी खास हो जाता है। मंदिर परिसर और आसपास के धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही भक्तिमय माहौल बना हुआ है।

किसानों के लिए खास है हरियाली अमावस्या

हरियाली अमावस्या का पर्व किसानों के लिए भी विशेष महत्व रखता है। चित्रकूट पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में बड़ी संख्या आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और किसान परिवारों की बताई जा रही है।

किसान इस मौके पर अच्छी बारिश और खेतों में बेहतर फसल की कामना लेकर चित्रकूट पहुंचते हैं। मानसून के मौसम में खेती के लिए पर्याप्त बारिश की उम्मीद किसानों के लिए खरीफ फसल से सीधे जुड़ी होती है।

इसी उम्मीद के साथ किसान मंदाकिनी में स्नान कर भगवान शिव और कामदगिरि की पूजा-अर्चना करते हैं और अच्छी बारिश, अच्छी पैदावार तथा परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक नगरी में हर तरफ दिखाई दे रही भीड़

हरियाली अमावस्या के चलते चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थलों और घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ दिखाई दे रही है। मंदाकिनी के घाटों पर सुबह से ही स्नान और पूजा का सिलसिला जारी है।

कामदगिरि परिक्रमा मार्ग पर भी बड़ी संख्या में भक्त नजर आ रहे हैं। श्रद्धालुओं के आने से चित्रकूट का धार्मिक वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है।

अमावस्या जैसे प्रमुख पर्वों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के कारण चित्रकूट में यातायात और भीड़ प्रबंधन भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

आस्था के साथ प्रकृति और खेती का भी पर्व

हरियाली अमावस्या केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और खेती से भी गहराई से जुड़ी हुई है। सावन की बारिश के बीच चारों ओर फैली हरियाली इस पर्व के नाम और भाव को और खास बनाती है।

चित्रकूट में इस पर्व का एक अलग ही स्वरूप दिखाई देता है, जहां श्रद्धालु धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति और कृषि की समृद्धि की भी कामना करते हैं।

किसानों के लिए अच्छी बारिश का मतलब खेतों में पर्याप्त नमी और खरीफ फसलों के बेहतर उत्पादन की उम्मीद है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर चित्रकूट की यात्रा उनके लिए धार्मिक आस्था के साथ भविष्य की अच्छी फसल की उम्मीद भी लेकर आती है।

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