शिमला। डिजिटल डेस्क
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुक्रवार से शुरू हो रहा है। 3 सितंबर तक चलने वाले इस सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस की संभावना है। भाजपा ने विधायकों और नेताओं के खिलाफ दर्ज एफआईआर तथा जांच को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी की है।
पहले दिन श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगा प्रश्नकाल
विधानसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होगी। पहले दिन पूर्व विधायक स्वर्गीय विजेंद्र सिंह और राम चंद भाटिया के निधन पर सदन में शोक प्रस्ताव लाया जाएगा। इसके बाद प्रश्नकाल होगा।
इस बार विधानसभा सचिवालय को सदस्यों की ओर से कुल 1,036 सवाल प्राप्त हुए हैं। इनमें 787 तारांकित और 249 अतारांकित प्रश्न शामिल हैं।
विधायकों के सवालों में आपदा राहत, स्कूलों के विलय, सड़क और शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यटन तथा नशे की रोकथाम जैसे मुद्दे शामिल हैं। 27 अगस्त को गैर-सरकारी सदस्य कार्य दिवस रखा गया है।
भाजपा विधायकों पर एफआईआर और जांच बनेगा मुद्दा
सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा विधायक दल ने बैठक कर विधानसभा में सरकार को घेरने की रणनीति पर चर्चा की।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भाजपा विधायकों और नेताओं के खिलाफ दर्ज मामलों तथा चल रही जांच को प्रमुख मुद्दा बताया है। भाजपा का आरोप है कि सरकार राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई कर रही है।
हाल के दिनों में भाजपा विधायक सुधीर शर्मा और भरमौर से विधायक डॉ. जनक राज से जुड़े मामलों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी हुई है। हालांकि, सरकार भाजपा के राजनीतिक प्रतिशोध के आरोपों को खारिज करती रही है।
जानकारी नहीं देने के आरोप पर भी आमने-सामने सरकार-विपक्ष
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि विधानसभा में सवाल पूछे जाने पर कई बार पूरी जानकारी नहीं दी जाती, जबकि वही जानकारी सूचना के अधिकार यानी RTI के जरिए उपलब्ध हो जाती है।
भाजपा विधायक रणधीर शर्मा के अनुसार, कांग्रेस की ओर से वंदे मातरम के केवल दो छंद गाने के निर्णय के विरोध में पार्टी विधायक दल की बैठक में निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया।
दूसरी ओर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। इसमें सरकार की ओर से सदन में जनहित के मुद्दों पर जवाब देने और विपक्ष के सवालों का सामना करने की रणनीति पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष से हंगामे और वॉकआउट के बजाय सदन में मुद्दे उठाने और चर्चा में हिस्सा लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस बार 10 दिन का सत्र रखा गया है, इसलिए विपक्ष को चर्चा के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिया नियमों के पालन पर जोर
सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक भी हुई। इसमें संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर और उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानियां शामिल हुए।
बैठक में सदन की कार्यवाही सुचारू रखने और जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को लेकर विचार-विमर्श हुआ। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष का दायित्व सरकार से सवाल पूछना है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी उन सवालों का स्पष्ट और सही जवाब देना है।
उन्होंने कहा कि सदन में चर्चा के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध है और जनहित के मुद्दों पर सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा।
अध्यक्ष के अनुसार 14वीं विधानसभा की उत्पादकता मानसून सत्र से पहले औसतन 90 से 132 प्रतिशत के बीच रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस सत्र में भी सभी सदस्यों के सहयोग से सदन की कार्यवाही प्रभावी ढंग से चलेगी।
सरकार बोली- छिपाने के लिए कुछ नहीं
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा में मांगी गई जानकारी तथ्यों के साथ उपलब्ध कराती है।
उन्होंने विपक्ष से अपील की कि सदन में ऐसे मुद्दे उठाए जाएं, जिनका सीधा संबंध प्रदेश और जनता के हितों से है।
विधानसभा की सुरक्षा में 750 पुलिसकर्मी तैनात
मानसून सत्र को देखते हुए शिमला में सुरक्षा और यातायात व्यवस्था भी मजबूत की गई है। पुलिस के अनुसार विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्रों में करीब 750 पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्र को तीन मुख्य सेक्टरों और कई उप-सेक्टरों में बांटा गया है। आने-जाने वाले लोगों और वाहनों की निगरानी के लिए बहुस्तरीय जांच व्यवस्था लागू की गई है।
सत्र के दौरान राजनीतिक गतिविधियों और संभावित प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया है।